महाराष्ट्र से होने वाले निगम चुनावों से पहले ही बीजेपी को गुड न्यूज मिली है। राज्य में उसके छह उम्मीदवार निर्विरोध ही चुनाव जीत गए हैं। महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनावों के लिए नामांकन पत्रों की जांच बुधवार को पूरी हो गई। नामांकन पत्रों की जांंच के बाद बीजेपी के छह उम्मीदवार बिना मुकाबले ही जीत गए। इससे बीजेपी चुनाव में उतरने से पहले ही मजबूत स्थिति में पहुंच गई है।

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में बीजेपी ने बिना मुकाबले तीनों सीटों पर जीत हासिल कर हैट्रिक पूरी की। वार्ड 18-ए (ओबीसी आरक्षित) से रेखा चौधरी बिना मुकाबले चुनी गईं। वह बीजेपी महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष और अनुभवी पार्षद हैं और इस वार्ड से एकमात्र उम्मीदवार थीं।

वार्ड 26-सी से पहली बार चुनाव लड़ रही आरएसएस से जुड़े परिवार की आसवरी नवरे भी बिना मुकाबले जीत गईं। वार्ड 26-बी से रंजना पेरकर भी बिना मुकाबले चुनी गईं, जिससे भाजपा कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में तीनों शुरुआती जीतों से मजबूत हो गई है। बीजेपी के राज्य अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने विजेताओं को बधाई दी और कहा कि पार्टी का खाता महिला नेताओं ने खोला। उन्होंने तीनों बिना मुकाबले चुने गए उम्मीदवारों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच वीडियो कॉल भी करवाई।

पनवेल में नितिन पाटिल जीते

पनवेल नगर निगम में बीजेपी के नितिन पाटिल बिना मुकाबले चुने गए। उनके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी, किसान और मजदूर पार्टी के रोहन गावंड का नामांकन जाति प्रमाण पत्र गलत होने के कारण रद्द कर दिया गया। धुले नगर निगम में भी बीजेपी ने दो सीटें बिना मुकाबले जीत लीं। एनसीपी (शरद पवार समूह) के शहर जिला अध्यक्ष रंजीत भोसले की पत्नी उज्ज्वला भोसले दो दिन पहले ही बीजेपी में शामिल हो गईं। उनके विरोधी उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने के बाद उनकी जीत पक्की हो गई। वार्ड 6-बी से ज्योत्सना प्रफुल पटील भी बिना मुकाबले चुनी गईं।

फड़नवीस बोले- बिना मुकाबले जीत का मतलब जनता का भरोसा ज्यादा

ज्यादातर बिना मुकाबले जीतें तकनीकी कारणों से विरोधियों के नामांकन रद्द होने या आरक्षित वार्ड में कोई मुकाबला न होने के कारण हुईं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि हर सीट महत्वपूर्ण है, लेकिन बिना मुकाबले जीत का मतलब है कि जनता का भरोसा ज्यादा है और कुछ इलाकों में मजबूत विरोधी नहीं हैं। पार्टी नेताओं ने कहा कि शुरुआती सफलता ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है।

कई जगह सामने नजर आएंंगे बीजेपी-शिवसेना

इस चुनाव में महायुति गठबंधन के अंदर मतभेद भी सामने आए हैं। भाजपा और शिवसेना (शिंदे समूह) मुंबई और ठाणे में सीट शेयरिंग कर रही हैं, लेकिन 29 नगर निगमों में से 24 में गठबंधन के बीच सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में महायुति की तीन पार्टियां, भाजपा, शिंदे-शिवसेना और अजित पवार-एनसीपी, कई शहरों में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी।

जिन जिलों में ये पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती नजर आएंगी, वे जलना, परभणी, लातूर, अमरावती, पिंपरी-चिंचवड़, छत्रपति संभाजीनगर, सोलापुर, अकोला, मालेगांव, नांदेड, नागपुर, सांगली, नासिक, धुले, पुणे, मुंबई, ठाणे, उल्हासनगर, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर, भिवंडी और वसई-विरार हैं।

बीजेपी–एनसीपी (अजित पवार) गठबंधन सिर्फ अकोला, अहिल्यानगर और पनवेल में ही है। बीजेपी–शिवसेना (शिंदे) गठबंधन केवल चंद्रपुर, नागपुर, मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और भिवंडी में है। इसके अलावा, महायुति की पार्टियां इचलकरंजी (फ्रेंडली फाइट), कोल्हापुर, जलगांव और पनवेल में भी सीधे मुकाबले में होंगी। (इनपुट – IANS)

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