महाराष्ट्र में कल्याण डोंबिवली म्यूनिसिपल ट्रांसपोर्ट (KDMT) के एक 52 वर्षीय बस कंडक्टर ने रविवार को कोरोना के चलते दम तोड़ दिया। मृतक बस कंडक्टर के परिजनों का दावा है कि वह मरीज को लेकर कई अस्पताल गए लेकिन वहां उन्हें भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार एक अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया। बता दें कि इससे पहले केडीएमटी के ही एक बस ड्राइवर की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गई थी।
मृतक के परिजनों का कहना है कि उनका परिवार अंबेरनाथ इलाके में रहता है और वह इलाज के लिए कई अस्पतालों में भटके थे लेकिन किसी भी अस्पताल में कंडक्टर को भर्ती नहीं किया गया। कई दिन भटकने के बाद थाणे सिविक अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया लेकिन वहां इलाज के दौरान कंडक्टर की मौत हो गई।
केडीएमटी कंडक्टर के बेटे का कहना है कि मंगलवार को वह अपने पिता को लेकर अंबेरनाथ के सरकारी अस्पताल छाया हॉस्पिटल में लेकर गया था, जहां उनका कोरोना टेस्ट किया गया। इसके बाद उन्हें उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल में जाने को कह दिया गया।
मृतक के बेटे का आरोप है कि उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल से उन्हें कथित तौर पर रुकमणीबाई हॉस्पिटल जाने को कहा गया क्योंकि उस वक्त वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। रुकमणिबाई अस्पताल में यह कहकर मरीज को भर्ती नहीं किया गया क्योंकि वह बाहरी है और अंबेरनाथ इलाके में रहते हैं।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद कंडक्टर के परिजन उन्हें घर ले आए, जहां उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि दो दिन बाद ही इस अस्पताल से भी मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद मरीज के परिजन उन्हें लेकर थाणे सिविक अस्पताल लेकर पहुंचे जहां इलाज के दौरान कंडक्टर की मौत हो गई।
वहीं निजी अस्पताल के प्रतिनिधि का कहना है कि मरीज के परिजनों की मांग पर उसे डिस्चार्ज किया गया था। वहीं केडीएमटी के अधिकारियों का कहना है कि वह मामले को देख रहे हैं कि इसमें कहां गलती हुई। बता दें कि समय पर इलाज नहीं मिलने के चलते कई मरीजों की जान जाने की खबरें हाल के दिनों में सामने आ चुकी हैं।

