महाराष्ट्र में सरकार गठन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आज इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई में महाराष्ट्र भाजपा की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी कोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को एडवांस में फ्लोर टेस्ट करने को कह सकता है? इस मामले में जो याचिका दाखिल की गई है, उसमें एनेक्चर भी नहीं है, उन्हें कुछ भी नहीं पता है। वह (याचिका दाखिल करने वाली राजनैतिक पार्टियां) बीते 3 हफ्तों से सो रहे थे? अपने दावे के पक्ष में पार्टियों ने कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किया है।

मुकुल रोहतगी द्वारा याचिका पर सवाल उठाए जाने पर मामले की सुनवाई कर जस्टिस एनवी रामन्ना ने चुटकी लेते हुए मुहावरा बोला और कहा कि ‘स्काई इज लिमिट’ यानि कि किसी को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। यहां कोई भी कुछ भी पूछ सकता है। कोई भी व्यक्ति यहां खुद को पीएम बनाने की भी मांग कर सकता है।

बता दें कि शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के उस फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है, जिसमें राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस को सीएम और अजित पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलायी। तीनों पार्टियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी अदालत में पेश हुए। संयुक्त गठबंधन की तरफ से कोर्ट में मांग की गई कि महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार का आज ही शक्ति परीक्षण होना चाहिए। कपिल सिब्बल ने महाराष्ट्र से बिना कैबिनेट मीटिंग के राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के फैसले पर सवाल खड़े किए और इसे अजीब बताया। वहीं सिंघवी ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। बता दें कि कोर्ट अब इस मसले पर सोमवार को सुनवाई करेगा।