महाराष्ट्र में 15 जनवरी को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के साथ ही 29 नगर निगमों में भी चुनाव होने हैं। 29 नगर निगमों में से कम से कम 20 नगर निगम ऐसे हैं, जहां बीजेपी को पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे वजह बाहर से आए लोगों को पार्टी का टिकट दिया जाना है।
ऐसे नगर निगमों में नागपुर नगर निगम भी शामिल है। यह नगर निगम इसलिए अहम है क्योंकि यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है।
बीजेपी ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी और उसके बाद से पार्टी ने लगातार अपना विस्तार किया है लेकिन निगम चुनाव के दौरान पार्टी में बड़े पैमाने पर असंतोष की खबरें सामने आई हैं।
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बीजेपी में अंदरुनी बनाम बाहरी की बहस पहले भी छिड़ चुकी है लेकिन इस बार विरोध ज्यादा हो रहा है।
फड़नवीस ने लगाई नेताओं की ड्यूटी
कई नेताओं की नाराजगी इतनी ज्यादा है कि उन्हें मनाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को अपने मंत्रियों और पार्टी के सीनियर नेताओं की ड्यूटी लगानी पड़ी है।
नए चेहरों को टिकट दिए जाने के चलते पुराने नेता और कार्यकर्ता नाराज हैं। जिन नगर निगमों में नए या बाहरी उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा टिकट दिए गए हैं उनमें नांदेड़ (45), सोलापुर और जालना (30-30), नवी मुंबई (28), पुणे (25 ) और नासिक (24) शामिल हैं। मुंबई में पार्टी ने 15 बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं।
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42 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
हालात इस कदर खराब हैं कि नागपुर में पार्टी के 42 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। कई उम्मीदवारों ने नागपुर में प्रदर्शन किया। नासिक में बगावत इतनी ज्यादा हो गई कि टिकट न मिलने पर स्थानीय नेताओं ने जिलाध्यक्ष का पीछा तक किया और उनके फार्म हाउस में घुस गए। इसके बाद मुंबई समेत कई जिलों के साथ-साथ नासिक में भी बीजेपी मुख्यालय के बाहर अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात करना पड़ा है।
छत्रपति संभाजी नगर में बीजेपी के नाराज कार्यकर्ताओं ने टिकट बंटवारे के विरोध में कैबिनेट मंत्री अतुल सावे और बीजेपी सांसद भागवत कराड का घेराव किया। दो महिला कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल की, एक उम्मीदवार ने अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया।
कोई दूसरा विकल्प नहीं
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि केंद्र सरकार का निर्देश है कि हर चुनाव और हर सीट जीतनी है। मुंबई में बीजेपी के एक पुराने कार्यकर्ता कहते हैं, ‘जब हम पार्टी में आए थे तब किसी को भरोसा नहीं था कि हम सरकार बना पाएंगे लेकिन अब जब हम सरकार में हैं तो हमें बाहरी लोगों के लिए कार्पेट बिछाना जारी रखना होगा। शीर्ष नेतृत्व जानता है कि कट्टर कार्यकर्ता पार्टी नहीं छोड़ेगा क्योंकि उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।’
बीजेपी के मंत्री गिरीश महाजन कहते हैं कि यह परेशानी इतनी बड़ी नहीं है जितनी बताई जा रही है। महाराष्ट्र बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले कहते हैं कि बीजेपी में हर सीट के लिए कई उम्मीदवार हैं इसलिए सभी को टिकट दे पाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन में हर उम्मीदवार को उचित जगह जरूर देगी।
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