दिल्ली की एक अदालत ने जमीन के बदले नौकरी घोटाले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए लालू परिवार पर आरोप तय कर दिए हैं। साथ ही लालू यादव परिवार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस परिवार ने एक आपराधिक गिरोह यानी सिंडिकेट की तरह काम की है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने जमीन के बदले नौकरी मामले में कहा कि लालू यादव ने अपने परिवार के लिए सार्वजनिक नौकरी को हथियार की तरह इस्तेमाल किया, ऐसे में यह मामला सुनवाई किए जाने योग्य है। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए लालू, रबड़ी, तेज प्रताप, तेजस्वी, मीसा और हेमा यादव पर आरोप तय किए।

जज ने क्या कहा?

राउज़ एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने अपने आदेश में कहा, “अदालत संदेह के आधार पर यह पाती है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने परिवार (बेटियों, पत्नी और बेटों) की खातिर अचल संपत्तियां हासिल करने के लिए सार्वजनिक रोजगार को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की एक बड़ी साजिश रची थी।”

लालू की याचिका खारिज

लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, अदालत ने कहा कि सीबीआई की चार्जशीट से पता चलता है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के करीबी सहयोगियों ने इस साजिश में अहम भूमिका निभाई।

इसके बाद अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार की दायर रिहाई की याचिका को पूरी तरह से अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया।

मामले में 52 लोगों को बरी किया गया

इसके अलावा अदालत ने इस मामले में 98 आरोपियों में से 52 व्यक्तियों को बरी कर दिया, जिनमें कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। कोर्ट ने कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं इसमें लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव और तेजस्वी, बेटी मीसा और हेमा यादव समेत कई अन्य आरोपियों के नाम हैं।

अदालत ने इस मामले में 107 लोगों को आरोपी बनाया है। हालांकि इनमें से पांच की मौत हो चुकी है।

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