राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्यों ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रियों अरुण जेटली और पीयूष गोयल की टिप्पणियों के विरोध में भारी हंगामा किया। इस कारण बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित की गई। जेटली ने गुजरात के एक मंदिर में जाति पूछे जाने संबंधित शैलजा के बयान पर टिप्पणी की थी। जबकि गोयल ने कांगे्रस के विरोध को कृत्रिम समस्या बताया। हंगामे के कारण सदन में प्रश्नकाल नहीं हो पाया।

बैठक शुरू होने पर जेटली ने कहा कि दो दिन पहले ही एक विपक्षी सदस्या ने संविधान पर चर्चा के दौरान कहा था कि गुजरात के एक मंदिर में उनके साथ भेदभाव हुआ था और उनकी जाति पूछी गई थी। गौरतलब है कि पिछले सोमवार को शैलजा ने सदन में दावा किया था कि वे जब केंद्रीय मंत्री थीं तब गुजरात के द्वारका मंदिर गई थीं और वहां उनसे जाति पूछी गई थी। जेटली ने कहा, मैंने इस बारे में जानकारी हासिल की। मुझे पता चला कि सदस्या ने फरवरी 2013 में मंदिर की अतिथि पुस्तिका में मंदिर के बारे में बहुत ही अच्छी टिप्पणियां की हैं।

जेटली ने कहा, सदस्या ने मंदिर के प्रबंधन, वहां की व्यवस्था आदि के बारे में सकारात्मक टिप्पणियां करते हुए लिखा है कि अच्छी तरह दर्शन हुए। अगर सदस्या के साथ कोई भेदभाव होता तो वे इतनी अच्छी टिप्पणियां कभी नहीं करतीं जैसी उन्होंने की थी। उन्होंने तो कोई शिकायत ही नहीं की। सदन के नेता के इतना कहते हुए शैलजा ने कहा कि मैंने दो दिन पहले जब यह बात कही थी तब ही स्पष्ट कर दिया था कि मैं द्वारका के मुख्य मंदिर के बारे में बात नहीं कर रही हूं। उन दिनों मैं संस्कृति मंत्री थी और मुख्य मंदिर में मेरे साथ बहुत ही अच्छा व्यवहार किया गया था। मैं द्वारका के मुख्य मंदिर के आगे गई थी और बेट द्वारका के मंदिर में मुझसे जाति पूछी गई थी।

शैलजा ने कहा कि आम तौर पर पूजा के लिए पुजारी गोत्र पूछते हैं जाति नहीं। लेकिन वहां मुझसे जाति पूछी गई थी। उन्होंने कहा कि मंत्री ने सदन को गुमराह किया है जो नहीं किया जाना चाहिए और न ही सदन की गरिमा गिराई जानी चाहिए। कांग्रेस के सदस्यों ने शैलजा के प्रति समर्थन जताया और जेटली की बात का विरोध किया। हंगामे के बीच उप सभापति पीजे कुरियन ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपनी अपनी बात रख दी व इस मुद्दे पर और चर्चा नहीं की जाएगी। उन्होंने सदस्यों से अपने स्थानों पर जाने और कार्यवाही आगे चलने देने को कहा।

इस बीच पीयूष गोयल ने कहा कि सदन में बार-बार व्यवधान डालने के लिए कृत्रिम समस्याएं उत्पन्न की जाती हैं। उनकी इस बात पर शैलजा सहित कांग्रेस सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई और आसन के समक्ष आकर नारे लगाने लगे। हंगामे के कारण कुरियन ने बैठक 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। बैठक के फिर शुरू होने पर सदन में कांग्रेस सदस्यों का हंगामा जारी था। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सदन में शांति का माहौल था, लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से उकसावे वाला बयान दिया गया जो सदन की भावना के अनुकूल नहीं है।

कुरियन ने आसन के समक्ष आ कर नारेबाजी कर रहे कांग्रेस सदस्यों को लौट जाने को कहा। लेकिन अपनी बात का असर न होते देख उन्होंने बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी। बैठक शुरू होने पर एक बार फिर कांग्रेस के सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कुछ कहना चाहा। लेकिन हंगामे के कारण उनकी बात सुनी नहीं जा सकी। सदन में व्यवस्था बनते न देख सभापति हामिद अंसारी ने कुछ ही मिनट बाद बैठक को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

सोमवार को जब शैलजा ने यह मुद्दा उठाया था तब जेटली ने उनसे पूछा था कि क्या इस मुद्दे को वे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाई थीं। दोपहर दो बजे बैठक शुरू होने पर भी वही नजारा दिखा और कांग्रेस के सदस्य आसन के समीप आ गए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। तृणमूल के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह मामला समाप्त हो गया था। लेकिन पीयूष गोयल की टिप्पणी से यह नौबत आई। उन्होंने सुझाव दिया कि गोयल को माफी मांगनी चाहिए।

माकपा के सीताराम येचुरी ने भी ऐसी ही राय व्यक्त की और कहा कि गोयल की टिप्पणी गैरजरूरी थी और उन्हें अपने शब्द वापस लेकर माफी मांगनी चाहिए, जिससे सदन में कामकाज सुचारु रूप से हो सके। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में बाढ़ के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है और सदन में उस विषय पर चर्चा होनी चाहिए। सपा के नरेश अग्रवाल ने भी तमिलनाडु में बाढ़ के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने पर जोर दिया। संसदीय कार्य मंत्री नकवी ने कहा कि शैलजा ने अपने भाषण में द्वारका मंदिर का जिक्र किया था। उन्होंने सुझाव दिया कि द्वारका मंदिर से जुड़ी शैलजा की टिप्पणी के साथ गोयल की बात को भी कार्यवाही से निकाल दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस सदस्यों को शांत करने का प्रयास करते हुए उपसभापति पीजे कुरियन ने कहा कि तमिलनाडु में स्थिति गंभीर है और उस विषय पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। हंगामे पर अपनी नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि सदस्य आसन को भी बोलने नहीं दे रहे हैं। कुरियन ने कहा कि सदन चलाना उनकी जिम्मेदारी है और वे इस मुद्दे का समाधान करना चाहते हैं। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सत्तापक्ष की ओर से की गई टिप्पणी नहीं होनी चाहिए थी और इस टिप्पणी ने मामले को जटिल बना दिया। यह मामला गंभीर है और वह इसका समाधान आसन पर छोड़ते हैं।

जद (एकी) के केसी त्यागी ने कहा कि शैलजा सदन की वरिष्ठ सदस्य हैं और उनकी संतुष्टि के बगैर मामला खत्म नहीं हो जाता। इस पर कुरियन ने सदन के नेता जेटली, विपक्ष के नेता आजाद और अन्य दलों के नेताओं की बैठक अपने कक्ष में बुलाई और सदन को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद भी दो बार और बैठक स्थगित हुई व अंतत: साढ़े तीन बजे कुरियन ने घोषणा की कि यह मामला अभी लंबित है और गुरुवार को सभापति के समक्ष इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा। इसके बाद सदन में तमिलनाडु सहित कई राज्यों में भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति के मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा शुरू हुई।