CPI(M) के वरिष्ठ नेता और मंत्री साजी चेरियन ने विवादित बयान दिया था। इसके बाद जब उनका विरोध बढ़ा तो उन्होंने माफी मांग ली। हाल ही में स्थानीय निकाय चुनावों में मुस्लिम विजेताओं को लेकर साजी चेरियन ने टिप्पणी की थी, जिसका विरोध मुस्लिम संगठनों ने किया था। वहीं कांग्रेस ने सीपीआईएम पर संघ की विचारधारा के अनुसार काम करने का आरोप लगाया था।
CPI(M) ने क्या कहा था?
स्थानीय चुनावों के नतीजों का जिक्र करते हुए साजी चेरियन ने सोमवार को कहा था, “कासरगोड नगर पालिका और मलप्पुरम जिला पंचायत में विजेताओं की सूची देखिए। ऐसी स्थिति होगी जहां कोई व्यक्ति ऐसी जगह नहीं जीत सकता जहां उसका समुदाय बहुमत में न हो। मुस्लिम इलाकों में IUML जीतती है, और हिंदू इलाकों में BJP। जबकि, CPI(M), जो धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देती है, वह हार रही है। 39 सीटों वाली कासरगोड नगर पालिका में CPI(M) को सिर्फ एक सीट मिली जबकि कांग्रेस को दो मिली। BJP, जिसने सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया, उसे 12 सीटें मिलीं और IUML को 22 मिली। मैं उनके नाम पढ़ना चाहता था। मैं चाहता था कि केरल में कहीं और ऐसी स्थिति न हो।”
इसके बाद विपक्षी कांग्रेस और विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने साजी चेरियन की टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि साजी चेरियन की टिप्पणी इस साल के विधानसभा चुनावों से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से थीं। प्रमुख मौलवी संगठन समस्ता जैसे मुस्लिम संगठनों ने साजी चेरियन के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें उनके इस्तीफे की मांग की गई। CPIM ने शुरू में साजी चेरियन का समर्थन किया था लेकिन उसे अल्पसंख्यक समुदाय के साथ-साथ अपने धर्मनिरपेक्ष वोट बैंक से भी विरोध का सामना करना पड़ा।
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साजी चेरियन ने मांगी माफी
बुधवार को साजी चेरियन ने एक बयान में कहा, “मुझे दुख है कि मेरे शब्दों को इस तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। मुझे गलत समझा गया है। यह आधारहीन अभियान मेरे जीवन में अपनाए गए धर्मनिरपेक्ष रुख को नुकसान पहुंचा रहा है। मैं जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर काम करता हूं। अपने 42 साल के सार्वजनिक जीवन में, मैंने सांप्रदायिकता से कभी समझौता नहीं किया है। हालांकि मेरे भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। मैं समझता हूं कि इस अभियान से मेरे भाइयों को दुख पहुंचा है। मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं और अपना बयान वापस लेता हूं।”
कांग्रेस ने लगाया आरोप
कांग्रेस के विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि CPI(M) संघ परिवार के रास्ते पर चल रही है और उस पर लोगों को बांटकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, “मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इसका समर्थन कर रहे हैं। साजी चेरियन और (पूर्व मंत्री ए के) बालन ने मुख्यमंत्री की सहमति से बयान दिए थे। CPIM खुद को संघ परिवार से अलग कैसे बता सकती है?” कांग्रेस नेता CPIM नेता बालन के एक बयान का जिक्र कर रहे थे, जिन्होंने कुछ दिन पहले कहा था कि अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF गठबंधन सत्ता में आता है, तो जमात-ए-इस्लामी गृह विभाग संभालेगी।
दरअसल जमात-ए-इस्लामी ने 2019 तक दशकों तक CPI(M) के नेतृत्व वाले LDF का समर्थन किया था। वहीं इसने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का समर्थन करने का फैसला किया। 2015 में CPI(M) ने जमात-ए-इस्लामी की राजनीतिक शाखा वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के समर्थन से कुछ स्थानीय निकायों पर शासन भी किया था। 2023 में CPI(M) ने खुले तौर पर IUML को लुभाया था और कहा था कि पार्टी की धर्मनिरपेक्ष सोच है।
CPI(M) नेताओं की हालिया टिप्पणियां पिछड़े हिंदू एजवा समूह, SNDP के नेता की उन टिप्पणियों के बीच आई हैं, जिनकी आलोचना सांप्रदायिक बताकर की गई है। SNDP नेता वेल्लापल्ली नटेसन ने शनिवार को कहा था कि केरल विधानसभा चुनावों में UDF की जीत का मतलब होगा कि IUML राज्य पर शासन करेगी। पढ़ें अमित शाह ने केरल में बीजेपी के मिशन का किया ऐलान
