दिल्ली की एक अदालत ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आपराधिक मानहानि की अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि केजरीवाल की ओर से इस्तेमाल किया गया शब्द “ठुल्ला” उन पुलिस अफसरों के लिए था जो ‘अप्रभावी’ हैं और ‘काम में सुस्त” हैं, साथ ही साथ ‘ठेलेवालों से पैसे वसूलते’ हैं।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने अपने फैसले में कहा, “प्रतिवादी (केजरीवाल) ने यह नहीं कहा कि दिल्ली पुलिस के सभी कर्मचारी ठुल्ला हैं। दूसरी तरफ ठुल्ला से ठीक पहले कोई शब्द का इस्तेमाल साफ दर्शाता है कि शिकायतकर्ता और पूरी दिल्ली पुलिस पर आरोप नहीं लगाया गया, बल्कि यह शब्द दिल्ली पुलिस के उन अफसरों के लिए कहा गया जिनकी उत्पादकता बाकी अफसरों की तुलना में कम है।”
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अदालत ने यह आदेश गोविंदपुरी पुलिस थाने के कांस्टेबल द्वारा दायर की गई आपराधिक मानहानि शिकायत पर दिया है। कांस्टेबल का दावा था कि सीएम ने एक टीवी इंटरव्यू में पुलिस को ‘ठुल्ला’ कहा जिससे उसकी बेइज्जती हुई। अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि ‘ठुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल उन अफसरों के लिए हुआ है जो ठीक से काम नहीं करते और रेहड़ी पटरी वालों से वसूली करते हैं।
अदालत ने कहा कि उनके पास प्रतिवादी के खिलाफ कार्रवाई करने और आईपीसी की धारा 500 के तहत सम्मन करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
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अपने आदेश में मजिस्ट्रेट ने हालिया सुप्रीम कोर्ट फैसले का भी जिक्र किया जिसमें मानहानि कानून के प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि इससे पहले कि शिकायतकर्ता दिल्ली पुलिस का सदस्य होने के नाते आईपीसी की धारा 499/500 के तहत शिकायत करे, उसे ये साबित करना होगा कि ‘ठुल्ला’ शब्द का प्रयोग पूरी दिल्ली पुलिस के लिए किया गया था।
