जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रविवार को छात्रों पर हुए हमले के बाद कैंपस का माहौल तनावपूर्ण है। यूनिवर्सिटी में दिल्ली पुलिस के 700 अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। किसी भी घटना को रोकने और उपद्रवियों पर लगाम लगाने के लिए एहतियातन पुलिसबल की तैनाती की गई है। वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शिक्षकों और छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए जेएनयू पहुंचा। इसमें शांतनु सेन, दिनेश त्रिवेदी, विवेक गुप्ता, मनीष भुइया शामिल थे। चारों ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने बैठकर अपना विरोध दर्ज किया।

इस बीच दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा को लेकर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को समन जारी किया है वहीं दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में मालीवाल ने दिल्ली पुलिस से इस मामले के सिलसिले में दर्ज की गयी प्राथिमिकी का ब्योरा मांगा है और हिंसा पर तत्काल कदम नहीं उठाने के कारण स्पष्ट करने को कहा है।

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष घोष ने सोमवार सुबह अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कहा, ‘परिसर में शांति मार्च के दौरान मुझे खासतौर पर निशाना बनाया गया। करीब 20-25 नकाबपोशों ने मार्च को बाधित किया और मुझ पर लोहे की छड़ों से हमला किया।’ वहीं एबीवीपी ने घटना में शामिल होने से इनकार करते हुए  के लिए घोष की अगुवाई वाले वाम सर्मिथत छात्रसंघ को जिम्मेदार ठहराया है।

जेएनयू में हिंसा को लेकर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। विपक्ष ने हिंसा की इस घटना पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में शिक्षकों और छात्रों पर हुए हमले को भाजपा की ‘फासीवादी र्सिजकल स्ट्राइक’ बताया। उनकी इस टिप्पणी का भगवा दल ने कड़ा विरोध किया और कहा कि बनर्जी को ‘घड़ियाली आंसू’ बहाना बंद करना चाहिए।