झारखंड विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को खूंटी पहुंचे। यहां जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने ‘अयोध्या के राजकुमार’ भगवान राम का आदिवासियों से संबंध जोड़ने की कोशिश की। पीएम मोदी ने कहा कि एक राजकुमार ने अयोध्या छोड़कर 14 साल वनवास झेला। वापस लौटकर वह ‘मर्यादा पुरुषोत्तम राम’ बने क्योंकि राजकुमार राम ने वो साल आदिवासियों के साथ गुजारे थे। बता दें कि झारखंड का खूंटी जिला आदिवासी बहुल है।

पीएम मोदी ने अयोध्या विवाद पर बोलते हुए कहा कि जिस विवाद को कांग्रेस और उसके सहयोगियों की सरकारों ने लगातार लटकाए रखा, वो भी शांतिपूर्ण ढंग से हल हो गया। ऐसे अनेक वादे जो हमने किए थे, वो आज जमीन पर उतर चुके हैं। आर्टिकल 370 का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब केन्द्र शासित जम्मू कश्मीर को विकास और विश्वास के पथ पर आगे ले जाने की जिम्मेदारी भी आदिवासी अंचल में ही जन्मे, पले-बढ़े उपराज्यपाल के कंधों पर है। बता दें कि सरकार ने बीते दिनों ही जम्मू कश्मीर में जीसी मुर्मू को उपराज्यपाल नियुक्त किया है।

खूंटी में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राज्य में पहले चरण के मतदान के बाद तीन बातें स्पष्ट हुई हैं। लोकतंत्र को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण में झारखंड के लोगों की गहरी आस्था है। भाजपा सरकार ने नक्सलवाद की कमर तोड़ी है, जिससे डर का माहौल कम हुआ है और विकास का माहौल बना है। झारखंड के लोगों में भाजपा सरकार के प्रति एक विश्वास की भावना है। ये भाव है कि झारखंड का विकास कोई दल कर सकता है तो वो सिर्फ भाजपा ही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज झारखंड के हर व्यक्ति को केन्द्र और राज्य सरकार की किसी ना किसी योजना का लाभ मिल रहा है। आज उन क्षेत्रों में भी बिजली का तार पहुंचा है, जहां पहुंचना मुश्किल था। विभिन्न क्षेत्र सड़कों से जुड़ रहे हैं। विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज उन जनजातीय इलाकों में भी पानी का पाइप पहुंच रहा है, जिन्हें कांग्रेस-जेएमएम की सरकारों ने अपने हाल पर छोड़ दिया था। आज गरीब, पिछड़ों और आदिवासी परिवारों को अपना घर मिल रहा है। जिन्हें विपक्षी सरकारों ने झोंपड़ियों में रहने को मजबूर कर रखा था।

पीएम ने कहा कि दिल्ली और रांची में भाजपा का डबल इंजन लोगों के जीवन को आसान बनाने का काम कर रहा है। कांग्रेस और जेएमएम की राजनीति को पीएम मोदी ने छल और स्वार्थ की राजनीति करार दिया।