जम्मू के सुंदरबनी सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से आतंकियों के घुसपैठ की नाकाम कोशिश का हवाला देते हुए सोमवार को भारतीय सेना ने पाकिस्तान को कड़े लहजे में चेताया है। सेना ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकियों पर लगाम लगाए, उन्हें पोषित करना बंद करे। अन्यथा हालात बिगड़ जाएंगे। भारतीय थलसेना ने दावा किया है कि घुसपैठ की कोशिश के दौरान जो दो आतंकी मारे गए हैं, वे दरअसल पाकिस्तानी सेना की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के जवान हैं, जो आतंकियों के साथ घुसपैठ कर भारत में दाखिल हुए थे। सेना ने पाकिस्तान से इन शवों को ले जाने को कहा है।
थल सेना के प्रवक्ता के मुताबिक, सीमा पर सैन्य कमांडरों की फ्लैग मीटिंग में भारत की ओर से विरोध दर्ज कराया गया है। सुंदरबनी में भारतीय सेना के गश्ती दल पर पाकिस्तानी घुसपैठियों के हमले को लेकर सख्त आपत्ति दर्ज कराई गई है। आधिकारिक रूप से भारतीय सेना की तरफ से पाकिस्तानी सेना को चेतावनी दी गई है कि वह आतंकियों को अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं करने दे। सुंदरबनी हमले को लेकर मंगलवार को सैन्य बलों के महानिदेशक (डीजीएमओ) स्तर की वार्ता होगी। भारतीय डीजीएमओ कड़ी आपत्ति दर्ज कराएंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘पाकिस्तानी सेना को स्थापित संचार माध्यमों से सूचित किया गया है कि वह मार गिराए गए अपने आतंकियों के शव ले जाए। पाकिस्तानी सेना को अपनी सरजमीं से संचालन कर रहे आतंकवादियों को काबू में रखने के लिए एक सख्त चेतावनी भेजी गई है।’
रविवार को दोपहर बाद पांच से छह पाकिस्तानी सशस्त्र घुसपैठियों के एक समूह ने राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा पार कर सेना के गश्ती दल पर गोलीबारी की। इसमें जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के तीन सैनिक-नौशेरा (राजौरी) के हवलदार कौशल कुमार, डोडा के लांस नाइक रणजीत सिंह और पल्लांवाला (जम्मू) के रजत कुमार बासन-शहीद हो गए और सांबा के राइफलमैन राकेश कुमार घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई के दौरान सेना की वर्दी पहने दो घुसपैठिए मारे गए। उनके पास से बरामद हथियारों और दस्तावेजों से पता चला कि वे पाकिस्तानी ‘बॉर्डर ऐक्शन टीम’ (बैट) के सदस्य थे। हालांकि, सेना के अधिकारियों ने उनकी पहचान का खुलासा नहीं किया। वे दोनों आतंकियों के साथ घुसे थे। दोनों ने पाकिस्तानी फौज की युद्धक वर्दी पहन रखी थी। पाकिस्तानी बैट सीमा पर आतंकियों के साथ काम करती है और भारतीय सैनिकों के शवों को क्षत-विक्षत करने के लिए कुख्यात रही है। करगिल युद्ध के दौरान कैप्टन सौरभ कालिया को बैट ने ही प्रताड़ित कर मार डाला था और उनके शव को क्षत-विक्षत कर दिया था।
सेना के अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान के आग्रह पर 29 मई को सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) स्तर की वार्ता हुई थी। तब से सरहद पार से उकसावे की हरकतों के बावजूद संघर्षविराम का पालन करने के लिए भारतीय सेना पूरा संयम बरत रही थी। 30 मई से ले कर अब तक भारतीय सेना ने घुसपैठ की सात कोशिशें नाकाम कीं जिनमें 23 आतंकवादी मारे गए। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में और हमलों की आशंका है और इसके मद्देनजर सेना की विभिन्न अग्रिम चौकियों को सतर्क किया गया है।
‘पाक आतंकियों का महिमामंडन बंद करे’
भारतीय सेना के साथ ही विदेश मंत्रालय ने भी पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के ताजा बयान को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा- अब समय आ गया है कि पाकिस्तान आतंकियों का महिमामंडन बंद कर दे। कश्मीर की समस्या के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है। वह आतंकियों का पोषण करता है और उनकी पाकिस्तानी फौज मदद करती है। विदेश मंत्रालय ने दो-टूक कहा कि भारत तब तक बातचीत नहीं करेगा, जब तक पाक आतंकवाद का साथ देता रहेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान लगातार गलतबयानी करता रहा है।
अलगाववादियों की हड़ताल का कश्मीर घाटी में असर
जम्मू कश्मीर के कुलगाम में मुठभेड़ स्थल पर विस्फोट से सात नागरिकों की मौत को लेकर अलगाववादियों की हड़ताल से सोमवार को कश्मीर घाटी में जनजीवन प्रभावित हुआ। श्रीनगर में दुकानें, निजी कार्यालय, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। घाटी में कई जगह प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया और नारेबाजी की। इस बीच, जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि सुरक्षा बल चाहते हैं कि कुलगाम जैसी घटनाएं न हों। इसी कारण लोगों को मुठभेड़ स्थलों से दूर रहने को कहा जाता है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, हड़ताल के कारण सरकारी कार्यालय और बैंकों में उपस्थिति कम रही। कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए एहतियाती तौर पर कई स्थानों पर भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक ने रविवार को हड़ताल का आह्वान किया था। कश्मीरी पंडित संगठन कश्मीर चैंबर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति और आॅल कश्मीर आॅटो रिक्शा ड्राइवर्स एसोसिएशन ने अलगाववादियों की हड़ताल को समर्थन दिया था। हड़ताल के मद्देनजर जम्मू कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड और इस्लामिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने सोमवार को होने वाली परीक्षाएं टाल दी।

