एनएसए अजीत डोवाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर पीछे हट रही हैं। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि पीएमओ के मुताबिक ना कोई घुसा है, ना कोई घुसा हुआ है तो फिर अब पीछे कैसे हट रहे हैं? ओवैसी ने ये भी पूछा कि पीछे हटने का मतलब ये है कि चीन जो करना चाहता है वो उसे करने दिया जाए? हम चीन पर विश्वास क्यों कर रहे हैं, जबकि उसने 6 जून को हुए समझौते का भी उल्लंघन किया था।

बता दें कि सोमवार को खबर आयी है कि एलएसी पर दोनों सेनाएं 1-2 किलोमीटर पीछे हटने को तैयार हो गई हैं। जिन इलाकों में दोनों सेनाएं पीछे हट रही हैं, उनमें गलवान, हॉट स्प्रिंग्स, फिंगर 4 और गोगरा इलाके हैं। सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि ओवैसी समेत कई अन्य नेताओं ने इस पर सवाल उठा दिए हैं।

दरअसल पीएम मोदी ने अपने एक बयान में कहा था कि किसी ने भी भारतीय सीमा में घुसपैठ नहीं की है और ना ही किसी चौकी पर कब्जा किया है। पीएम का यह बयान गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद आया था। जिसमें सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।

पीएम के इस बयान के बाद विपक्ष ने पीएम मोदी को घेर लिया था और सवाल उठाया था कि यदि किसी ने भारतीय सीमा में घुसपैठ नहीं की तो फिर सेना के 20 जवान कहां और क्यों शहीद हुए? विपक्ष के हमले के बाद सरकार बैकफुट पर नजर आयी थी। अब जब सेनाओं के पीछे हटने की खबर सामने आयी है तो ओवैसी समेत कई नेताओं ने पीएम के उसी बयान की याद दिलाते हुए पूछा है कि जब घुसपैठ हुई ही नहीं तो सेनाएं पीछे क्यों हट रही हैं?

ओवैसी के अलावा राहुल गांधी ने भी इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट कर पूछा कि यथास्थिति बहाल क्यों नहीं हुई है? चीन को हमारे 20 जवानों की शहादत को सही क्यों ठहराने दिया जा रहा है? गलवान घाटी की क्षेत्रीय संप्रभुता का समझौते में जिक्र क्यों नहीं है?

जाने माने रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ट्वीट कर बताया है कि बिना लड़े जीतना चीन की सन जू रणनीति का हिस्सा है। इसी रणनीति के चलते दक्षिण चीन सागर का भौगोलिक नक्शा बदल चुका है और वहां अभी तक एक भी गोली नहीं चली है। लद्दाख में भी उसने बिना एक गोली चलाए अहम स्थानों पर कब्जा किया हुआ है। एक और जीत के लिए वह थोड़ा पीछे हटने को तैयार है।