Karnataka CM Row: कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री परिवर्तन का मुद्दा गर्माया हुआ है। ताजा घटनाक्रम में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह मुख्यमंत्री परिवर्तन के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने इसे पार्टी में “चार और पांच लोगों” से जुड़ा एक सीक्रेट मामला बताया।

डीके शिवकुमार, जो कर्नाटक कांग्रेस के भी प्रमुख हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस सबसे पुरानी पार्टी के लिए कोई शर्मिंदगी पैदा नहीं करना चाहते हैं।

पीटीआई के अनुसार, डीके शिवकुमार ने मीडिया से कहा, “मुझे नहीं पता। मैंने मुख्यमंत्री बनने के लिए नहीं कहा है। यह हम पाँच-छह लोगों के बीच एक गुप्त समझौता है। मैं इस पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहता। मुझे अपनी अंतरात्मा पर विश्वास है। हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर काम करना चाहिए। मैं पार्टी को शर्मिंदा या कमज़ोर नहीं करना चाहता। अगर पार्टी है, तो हम हैं। अगर कार्यकर्ता हैं, तो हम भी हैं।” डीके शिवकुमार ने यह बातें अपने गृह क्षेत्र कनकपुरा के दौरे के दौरान कहीं।

शिवकुमार ने सिद्धारमैया के 2013-2018 के पांच साल के कार्यकाल का ज़िक्र करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री ( सिद्धारमैया ) ने अपनी बात कह दी है। वह एक वरिष्ठ नेता हैं, पार्टी के लिए एक धरोहर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर साढ़े सात साल पूरे कर लिए हैं।”

यह पूछे जाने पर कि उन्हें समर्थन देने वाले विधायक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस आलाकमान से मिलने के लिए दिल्ली जा रहे हैं। शिवकुमार ने जवाब दिया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे मंत्री पद हासिल करने के लिए प्रयास कर रहे होंगे। उन्होंने कहा कि मैंने उनमें से किसी (विधायक) को फ़ोन नहीं किया है, न ही उनसे बात की है। मैं उनसे यह नहीं पूछ रहा कि वे क्यों गए। मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, डीके शिवकुमार का समर्थन करने वाले छह कांग्रेस विधायकों का एक समूह 23 नवंबर को वरिष्ठ नेताओं से मिलने दिल्ली गया था। उन्होंने बताया कि शिवकुमार के मामले को आगे बढ़ाने के लिए कुछ और विधायकों के भी जल्द ही दिल्ली आने की संभावना है।

पिछले सप्ताह डीके शिवकुमार के समर्थक लगभग दस विधायकों ने इसी मांग के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की थी।

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सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने 20 नवंबर ढाई साल पूरा कर लिया। 2023 में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच “सत्ता-साझाकरण” समझौते की बात के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर सत्ता की खींचतान तेज हो गई है।

कर्नाटक सत्ता संघर्ष पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या कहा?

इस बीच, खड़गे ने भी कहा कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा सार्वजनिक रूप से नहीं उठाया जाना चाहिए। बुधवार को संविधान दिवस समारोह में शामिल होने दिल्ली आए वरिष्ठ नेता ने संवाददाताओं से कहा, “यह कोई ऐसा विषय नहीं है जिस पर यहां और वह भी सार्वजनिक रूप से चर्चा की जाए। मैं विशेष रूप से संविधान दिवस से संबंधित एक कार्यक्रम में शामिल होने आया हूं। कार्यक्रम के बाद, मेरी समीक्षा बैठकें होंगी, जिसके बाद मैं आगे बढूंगा। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बार-बार कहा है कि वह पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे और भविष्य में राज्य का बजट पेश करते रहेंगे।

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