पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद भारत के हामिद निहाल अंसारी 6 साल बाद स्वदेश लौट सके तो इस सफलता के पीछे एक पाकिस्तानी महिला की अहम भूमिका है। पाकिस्तानी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता रक्षंदा नाज अगर मदद नहीं करतीं तो हामिद के लिए स्वदेश लौटना मुश्किल होता। जेल में रहने के दैरान हामिद पर क्या बीती, इस बारे में वह मीडिया से अपनी बातें साझा कर रहे हैं, वहीं यह बात भी सामने आई है कि हामिद का केस लड़ने वाली रक्षंदा नाज ने न केवल अदालत में उनकी पैरवी की, बल्कि जेल में भी उनका ख्याल रखा। रक्षंदा नाज ने इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि वह जेल में हामिद के लिए बर्गर, चावल और दूध ले जाती थीं। नाज के मुताबिक हामिद को चीज बर्गर पसंद था इसलिए उन्होंने जेल में ये चीजें लाने की अनुमति ली। उन्होंने बताया कि कई मौकों पर जब हामिद को अस्पताल में भर्ती किया गया तब उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उसकी देखभाल भी की।
नाज ने केस के बारे में और भी अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार हामिद से मिलीं तो उसके पास चश्मा नहीं था। वह ठीक से देख नहीं सकता था। वह डर गया था कि एक बुजुर्ग महिला जेल में उससे मिलना चाहती थी। बता दें कि हामिद फेसबुक पर एक महिला से प्यार का इजहार करके उसे जबरन शादी से बचाने के लिए अफगानिस्तान के रास्ते अवैध रूप से पाकिस्तान में प्रवेश कर रहे थे तभी जासूसी के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
नाज ने बताया कि जब हामिद 2012 खैबर पख्तूनख्वा के कोहट में महिला से मिलने पहुंचे तो उसके पिता ने बताया कि वह पहले से शादीशुदा है। महिला की उम्र अब 27 वर्ष है और वह कभी हामिद से नहीं मिली। नाज को इस केस के बारे में दिल्ली के एक कार्यकर्ता से पता चला था। बाद में उन्होंने केस से जुड़े सभी दस्तावेज जुटाए और वकील काजी मोहम्मद अनवर के साथ काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने ठान लिया कि वह खुद हामिद को जेल से छुड़ाकर रहेंगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने हामिद की सभी फेसबुक चैट पढ़ीं और उसे बेकसूर पाया। इससे पहले 1999 में भी नाज पाकिस्तानी जेल से एक भारतीय को रिहा करवा चुकी हैं।

