दिल्ली की सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री रहीं कांग्रेसी नेत्री शीला दीक्षित शनिवार (20 जुलाई, 2019) को नहीं रहीं। आईएएस अफसर पति विनोद दीक्षित की मौत के 25 साल बाद उनका निधन हुआ है। कम ही लोग जानते हैं कि शीला को प्रेमी से शादी के लिए करीब दो साल तक इंतजार करना पड़ा था। ‘सिटिजन देल्हीः माइ टाइम्स, माई लाइफ’ किताब में उनकी प्रेम कहानी का जिक्र मिलता है। शीला की जिंदगी पर आधारित इस किताब के मुताबिक, डीयू में वह हिस्ट्री की पढ़ाई के दौरान विनोद से मिलीं। वही उनका पहला और आखिरी प्यार थे। वह क्लास के 20 छात्रों में सबसे अलग थे। हालांकि, शीला को एक नजर में प्रेम नहीं हुआ था।

बकौल शीला, “पांच फीट साढ़े 11 इंच लंबे विनोद सुंदर, सुडौल साथियों के बीच बेहद लोकप्रिय और अच्छे क्रिकेटर थे।” दोनों दोस्तों के प्रेम-विवाद सुलझाने के लिए आगे आते थे, उसी दौरान वे एक-दूजे के काफी करीब आए। किताब के अनुसार, “मैं चाहकर भी कई मौकों पर विनोद से बात नहीं कर पाती थी, क्योंकि मैं इन्ट्रोवर्ट थी। वैसे, विनोद खुले विचार वाले, हंसमुख और एक्स्ट्रोवर्ट थे।”

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दिवंगत कांग्रेस नेता ने दिल की बात विनोद तक पहुंचाने के लिए एक दिन उनके साथ डीटीसी बस में सफर किया था। बाद में वह उन्हें आंटी के घर ले गई थीं। विनोद ने उनसे शादी की बात भी बस में की थी। अंतिम वर्ष की परीक्षा से पहले विनोद ने शीला से कहा था, “मैं मां को बताने जा रहा हूं कि मैंने लड़की पसंद कर ली है, जिससे मैं शादी करूंगा।” शीला का जवाब था- क्या तुमने लड़की से पूछा है? विनोद बोले थे, “नहीं, पर वह लड़की बस में मेरी सीट के आगे बैठी है।”

शीला की किताब के मुताबिक, वायके के चंद दिन बाद उन्होंने विनोद के बारे में पैरेंट्स को बता दिया था, पर वे शादी पर आशंकित थे कि विनोद छात्र हैं। ऐसे में वह गृहस्थी कैसे चलाएंगे, जिसके बाद मामला शांत हो गया। शीला ने इसके बाद मोतीबाग स्थित दोस्त की मां के नर्सरी स्कूल में 100 रुपए सैलरी पर नौकरी की, जबकि विनोद आईएएस की तैयारी में जुट गए। इस दौरान दोनों का मिलना न के बराबर ही होता था। हालांकि, 1959 में विनोद आईएएस के लिए सेलेक्ट हो गए और उन्होंने यूपी कैडर चुना।

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विनोद का ताल्लुक उन्नाव (यूपी) के कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार से था। पिता उमाशंकर दीक्षित स्वतंत्रता सेनानी, हिन्दी भाषी और उच्च संस्कारों के थे। विनोद ने उनसे जब शीला की जनपथ स्थित होटल में भेंट कराई थी, तब वह घबराई हुई थीं। वैसे पिता ने शीला से मिलकर खुश हुए थे। वह बोले थे, “शादी के लिए दो हफ्ते, दो महीने या दो साल तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि विनोद की मां को अंतर जातीय विवाह के लिए मनाना पड़ेगा।” इसी चक्कर में लगभग दो साल तक शीला को इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद 11 जुलाई, 1962 को दोनों की शादी हुई।