दिल्ली-एनसीआर में रविवार सुबह एक बार फिर घना कोहरा देखने को मिला। सड़कों पर जीरो विजिबिलिटी की वजह से गाड़ी चलाना मुश्किल रहा और ठिठुरन ने भी लोगों की परेशानी बढ़ाई। पिछले कई दिनों से लगातार पूरे उत्तर भारत में ठंड का भीषण प्रकोप देखने को मिल रहा है, राजधानी दिल्ली में भी कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो रहे हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने रविवार को भी सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने को लेकर पीली चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार को अधिकतम तापमान 22 डिग्री तो न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस रिकार्ड होने का अनुमान है। अगले छह दिनों तक राजधानी में मध्यम कोहरा छाए रहने की संभावना जताई है। 19 व 20 जनवरी को न्यूनतम तापमान में वृद्धि की उम्मीद है जिसके कारण यह सात डिग्री बना रह सकता है।
वहीं, 21 व 22 जनवरी को इसमें एक डिग्री की गिरावट आने की संभावना जताई है जिसके चलते यह छह डिग्री रिकार्ड हो सकता है। 23 जनवरी को अधिकतम तापमान 19 डिग्री बना रह सकता है जबकि, न्यूनतम तापमान आठ डिग्री रेकार्ड हो सकता है। वहीं दिल्ली की शनिवार की सुबह घने कोहरे के साथ शुरू हुई, जिसकी वजह से दृश्यता में काफी कमी आई। सुबह के वक्त न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रेकार्ड किया गया है।
वैसे गाजियाबाद और नोएडा शहर प्रदूषण के मामले में देश के शीर्ष प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो गए हैं। गाजियाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 394 दर्ज किया गया है, जिसके साथ यह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहीं, नोएडा 388 के वायु गुणवत्ता सूचकांक के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। ग्रेटर नोएडा की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 332 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। हवा में घुले इस जहर के कारण स्थानीय निवासियों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्माग की मोटी चादर ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे दृश्यता भी काफी कम हो गई है।
दिल्ली में ग्रैप के चौथे चरण की पाबंदियां लागू
कुछ दिन राहत के बाद एक बार फिर दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। लिहाजा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शनिवार को फिर दिल्ली-एनसीआर में क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रैप) के चौथे चरण के तहत लगने वाले प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि राजधानी की वायु गुणवत्ता शनिवार को और बिगड़कर ‘गंभीर’ दर्जे में पहुंच गई है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) शाम चार बजे 400 दर्ज किया गया, जिससे यह एहतियाती कदम उठाया गया है। आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक, हवा की गुणवत्ता फिर बिगड़ने के पीछ कई कारक हैं। इनमें पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण बादलों की आवाजाही, हवा की गति में ठहराव और मौसम संबंधी अन्य परिस्थितियों के कारण हवा में मौजूद प्रदूषकों के फैलाव में कमी आ गई, जो पिछले दिनों तेज हवा के कारण हट गए थे, वह फिर घने हो गए।
इसके कारण प्रदूषण के कण वातावरण में निचले स्तर पर जमा हो गए और हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ कर गंभीर दर्जे में पहुंच गई। हवा रात में तापमान में गिरावट के साथ और खराब हुई और रात आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 428 हो गया, जो कि मानक के अनुसार गंभीर श्रेणी में आता है।
अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में वायु गुणवत्ता की मौजूदा गंभीर हालात को देखते हुए यह उपाय लागू किए गए हैं ताकि वायु गुणवत्ता में और गिरावट न आने पाए। आयोग की ग्रैप संबंधी उप-समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि ‘ग्रैप’ के चरण-4 के तहत सभी कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से पूरे एनसीआर में सक्रिय रूप से लागू किया जाए।
हवा की गुणवत्ता शुक्रवार से ही फिर बिगड़ने लगी थी। जिसके मद्देनजर आयोग ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-तीन के तहत निर्धारित प्रतिबंध लागू किया था। लेकिन हालात सुधरने के बजाय शनिवार को और खराब हो गए। लिहाजा और कड़े उपाय करने के तहत दिल्ली-एनसीआर में चौथे चरण के प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। जिसमें वाहनों की आवाजाही कम करने, स्कूलों की निचली कक्षाओं की छुट्टी या आनलाइन पढ़ाई के के आदेश के साथ हर तरह के निर्माण पर, अलाव जलाने पर रोक और अन्य कई उपाय शामिल हैं। ग्रैप प्रणाली वायु गुणवत्ता को चार चरणों में वर्गीकृत करती है। इसके तहत 201 से 300 के बीच एक्यूआइ को ‘खराब’ श्रेणी में, 301-400 ‘बहुत खराब’, 401-450 को ‘गंभीर’ और 450 से ऊपर एक्यूआइ को ‘गंभीर से भी अधिक’ श्रेणी में माना जाता है।
