भारतीय सेना में जल्द ही एकीकृत युद्ध समूहों (Integrated Battle Groups (IBGs) की स्थापना होगी। यह आत्मनिर्भर, चुस्त और ब्रिगेड के आकार की लड़ाकू इकाइयां होंगी। जल्द ही इस योजना को लागू किया जा सकता है। इसकी शुरुआत पानागढ़ स्थित XVII कोर से होगी जो देश की पहली पर्वतीय आक्रमण कोर (MSC) है और चीन के साथ लगी सीमा पर तैनात रहती है।
कई सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि 17 वीं एमएससी के दो डिवीजनों – 59 डिवीजन और 23 डिवीजन से चार आईबीजी बनाने के लिए चर्चा चल रही है। योजनाओं को सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद प्रत्येक आईबीजी की कमान संभवतः मेजर जनरल रैंक के अधिकारी के पास होगी और इसमें 5,000 से अधिक सैनिक होंगे। आईबीजी में कोई ब्रिगेड कमांडर नहीं होगा। वर्तमान योजनाओं के अनुसार, प्रस्तावित प्रत्येक आईबीजी में पैदल सेना की बटालियनें, तोपखाना रेजिमेंट, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर्स कोर (ईएमई), कॉम्बैट इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर और एक फील्ड अस्पताल होंगे।
आवश्यकता पड़ने पर आईबीजी कोर मुख्यालय के अधीन कोर इकाइयों और सत्रहवीं एमएससी की अन्य सहायक इकाइयों से रसद और अन्य सहायता प्राप्त कर सकेंगे। कोर मुख्यालय के अधीन एक अलग समूह भी स्थापित किया जा सकता है, जिससे आईबीजी को गोलाबारी में सहायता मिल सके। इनके गठन की योजना पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है और कार्यान्वयन से पहले इसमें और सुधार किए जा सकते हैं।
ये सेना की एक व्यापक पुनर्गठन योजना का हिस्सा हैं, जिसमें भैरव बटालियन, रुद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबान इकाइयों का गठन शामिल है। रुद्र ब्रिगेड की स्थापना आईबीजी के समान अवधारणा पर की गई है।
सत्रहवीं एमएससी सेना की चार स्ट्राइक कोर में से एक है। अन्य तीन मथुरा स्थित प्रथम कोर, अंबाला स्थित द्वितीय कोर और भोपाल स्थित इक्कीसवीं कोर हैं। 2021 से पहले सत्रहवीं एमएससी में एक डिवीजन था, उसके बाद पूर्वी मोर्चे पर अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए मौजूदा कोर से एक अतिरिक्त डिवीजन इसमें शामिल किया गया।
