यूरोपीय संघ के सांसदों ने आर्टिकल 370 को हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। इस दौरान पथराव की घटनाएं और पैलेट गन से चार लोगों के घायल होने की बात सामने आई। यूरोपीय सांसदों को कश्मीर का दौरे पर भेज भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर के हालातों को सबके सामने रखने की कोशिश की है।
‘ब्रीफिंग नोट्स एंड बैकग्राउंड ऑन कश्मीर’ मे दावा किया गया है कि कश्मीर का 91 फीसदी हिस्सा प्रतिबंध से मुक्त है। हालांकि इसमें मोबाइल फोन प्रतिबंध की बात कबूल की गई है और इसके पीछे आतंकियों को फायदा होने की बात कही गई है। बताया गया है कि 95 टेलिफोन एक्सचेंज में से 76 पूरी तरह से सक्रिय हैं। ब्रीफ नोट में बताया गया है कि सरकार का ‘पूरा फोकस’ राज्य में माहौल साधारण करने का है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संचार और प्रतिबंधों पर कुछ प्रतिबंध स्थानीय स्तर पर जारी हैं।
सांसदों के आने पर भी श्रीनगर के कई हिस्सों और अन्य क्षेत्रों से पत्थरबाजोंऔर सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान कठोर शटडाउन देखा गया। सुबह लगने वाले बाजार एक महीने में पहली बार बंद रहे। वहीं हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने जानकारी दी कि चार लोग पैलेट गन से घायल हुए जिन्हें श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
श्रीनगर के व्यापारी मोहम्मद यासिर ने बताया ‘लालचौक और अन्य कुछ हिस्सों में दुकानें बंद रहीं। मैंने सुना कि विदेशी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल कश्मीर दौरे पर आ रहा है तो मैंने भी अपनी दुकान न खोलने का फैसला लिया। दुकानों को बंद रखकर हमने विरोध जताया।’
वहीं इस दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट सड़क से नदारद दिखा। घाटी के अन्य जिलों से पूर्ण बंद की रिपोर्ट प्राप्त हुई। विदेशी सांसदों के श्रीनगर एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद एयरपोर्ट से जुड़ी सड़कों पर उच्च स्तरीय सुरक्षा थी। श्रीनगर के बादामी बाग छावनी स्थित सेना के 15वें कोर मुख्यालय में सांसदों की पहली बैठक हुई। इसमें क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म और घुसपैठ पर एक प्रेजेंटेशन दी गई है। इसके बाद सासंदों का एक ग्रुप श्रीनगर का भ्रमण करने निकल गया तो दूसरा गुपकर स्थित ललीत होटल में सिविल सोसायटी के सदस्यों से मुलाकात करने निकल पड़ा।
सांसद इसके बाद डल झील में चले गए और शिकारे की सवारी की। स्पैनिश सांसद हरमन टर्श ने संवाददाताओं से कहा, “जो कुछ हो रहा है उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए यह एक अच्छा अवसर है। हम (कुछ) सचेत हैं कि हमें कुछ लोगों से दूर रखा गया है।”
बता दें कि यूरोपीय संसद के इन सदस्यों ने अपनी दो दिवसीय कश्मीर यात्रा के पहले, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नयी दिल्ली में मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इनका स्वागत करने के साथ उम्मीद जताई थी कि जम्मू कश्मीर सहित देश के अन्य हिस्सों में उनकी यात्रा सार्थक रहेगी।
