India-EU FTA: यूरोपियन यूनियन के नेता 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर होंगे। उस राजकीय यात्रा के पहले विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि और यूरोपीय आयोग की नेता काजा कल्लास ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपियन यूनियन संघ मुक्त व्यापार समझौता एक रणनीतिक विकल्प है। यह FTA चीन रूस और अमेरिका पर उसकी निर्भरता को कम करने का अच्छा मौका देने वाला है।
दरअसल, एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के समकक्ष काजा कल्लास ने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत 27 जनवरी को भारत-यूरोपीय संघ नेताओं के शिखर सम्मेलन में एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर करेंगे। वह स्वयं इस शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी।
गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि हैं EU के नेता
बता दें कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के शनिवार को भारत आने वाले हैं। वहीं यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा रविवार को पहुंचेंगे। दोनों 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और 27 जनवरी को शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
भारत है मजबूत रणनीतिक सलाहकार
भारत के साथ संवाद को लेकर काजा कल्लास ने कहा कि हमने संवाद और सहयोग से शुरुआत की और आज हम व्यापार, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलकर काम करते हैं। गणतंत्र दिवस में यूरोपीय संघ के नेतृत्व को आमंत्रित करना एक बड़ा सम्मान है और यह सच्चे विश्वास को दर्शाता है। भारत अब केवल एक महत्वपूर्ण साझेदार नहीं है, बल्कि एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है। यह एक गुणात्मक परिवर्तन है।
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2 अरब लोगों का नया बाजार
भारत-यूरोपियन यूनियन संघ के बीच FTA को लेकर उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौता 2 अरब लोगों के लिए एक बाज़ार का निर्माण करेगा, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। यह समझौता निवेश और विकास को बढ़ावा देगा, सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और दोनों पक्षों की कंपनियों के लिए नए अवसर खोलेगा। इससे चीन, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भरता कम करने का भी मौका मिलेगा। ऐसे समय में जब मुक्त व्यापार दबाव में है और आपूर्ति श्रृंखलाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, हमारी आर्थिक साझेदारी को गहरा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह समझौता एक रणनीतिक निर्णय है।
समुद्री सुरक्षा से लेकर आतंकवाद विरोधी अभियान को लेकर क्या कहा?
काजा कल्लास ने वर्ल्ड ऑर्डर को लेकर कहा कि दुनिया अधिक खतरनाक होती जा रही है, इसलिए यूरोपीय संघ और भारत के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना स्वाभाविक कदम है। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यूरोपीय संघ और भारत दोनों ही रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं। अगले मंगलवार को यूरोपीय संघ और भारत एक नए सुरक्षा एवं रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। इससे समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और साइबर रक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग बढ़ेगा।
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चीन-अमेरिका को लेकर क्या कहा?
चीन और अमेरिका से मिलने वाली चुनौती को लेकर कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में यूरोप की गहरी हिस्सेदारी है और हम उसी के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। यूरोपीय संघ इस क्षेत्र के कई देशों का प्रमुख आर्थिक साझेदार है। जापान और दक्षिण कोरिया के साथ हमारी सुरक्षा और रक्षा संबंधी साझेदारियां भी हैं। हम सभी इस क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और नियमों पर आधारित बनाए रखने में रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि चीन के संदर्भ में, हमें यह स्वीकार करना होगा कि हमारे आर्थिक निर्णय सीधे तौर पर हमारी सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।
यूरोपियन यूनियन की नेता ने कहा कि चीन व्यापार को हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है, यूक्रेन में रूस के युद्ध का समर्थन करता है और दक्षिण चीन सागर में आक्रामक रुख अपनाता है। यद्यपि चीन हमारा एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, फिर भी हम अपने आर्थिक संबंधों को अपनी सुरक्षा की कीमत पर नहीं चलने दे सकते। यही कारण है कि यूरोपीय संघ ने अपनी आर्थिक सुरक्षा रणनीति बनाई है। हमारे पास विदेशी सब्सिडी और निवेश की कड़ी जांच से लेकर डंपिंग-रोधी शुल्क तक, व्यापार सुरक्षा के लिए मजबूत उपाय मौजूद हैं। हम महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की बेहतर सुरक्षा के लिए भी कदम उठा रहे हैं।
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रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत के साथ मतभेद पर कही ये बातें
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत और यूरोपीय संघ के बीच मतभेद रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध यूरोप के लिए एक गंभीर खतरा है। जिस तरह भारत अपने राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखता है, उसी तरह यूरोपीय संघ भी रखता है। मैंने पहले भी कहा है कि रूस के साथ भारत के ऊर्जा और रक्षा संबंध हमारे सहयोग पर संदेह पैदा करते हैं। यूरोप रूसी जीवाश्म ईंधन का आयात धीरे-धीरे बंद कर रहा है, क्योंकि हमने यह कड़वा सबक सीख लिया है कि रूस ऊर्जा का इस्तेमाल राजनीतिक ब्लैकमेल के लिए करता है।
उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन की बिक्री रूस के युद्ध के वित्तपोषण का एक प्रमुख स्रोत बनी हुई है, इसलिए रूस को कम धन मिलने का मतलब है कम युद्ध। एक ऐसी दुनिया जिसमें सीमाओं को बलपूर्वक बदला जा सकता है, हम सभी के लिए खतरनाक है, जिसमें भारत भी शामिल है। मैं अपने भारतीय समकक्षों के साथ नियमित रूप से ऐसे मुद्दों पर चर्चा करता हूं। ये बातचीत स्पष्ट और सम्मानजनक होती हैं। मार्क कार्नी से नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने वापस लिया गाजा पीस बोर्ड का निमंत्रण
