Maharashtra News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को कहा कि कुछ पार्टियां चुनाव नजदीक आने पर ही ‘मराठी’ का मुद्दा उठाती हैं, जबकि शिवसेना उन मराठी भाषी लोगों को वापस लाने के लिए काम कर रही है जो विपक्ष के कुप्रबंधन के कारण मुंबई और आसपास के इलाकों से ‘‘बाहर हो गए थे।’’
शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) पर “मुंबई को लूटने” का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्तारूढ़ महायुति पार्टी ही महानगर और उसके आसपास के शहरों की “सच्ची संरक्षक” है। उपमुख्यमंत्री ने कहा, “कुछ पार्टियां चुनाव नजदीक आने पर ही ‘मराठी’ मुद्दा उठाती हैं। हम मराठी भाषी लोगों को मुंबई वापस लाने के लिए काम कर रहे हैं। विपक्ष के कुप्रबंधन के कारण मुंबईवासियों और मराठी भाषी लोगों को शहर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।’’
शिंदे ने कहा, ‘‘हमने गड्ढा रहित सड़कों की पहल की है, मेट्रो परियोजनाओं में तेजी लाये हैं और तटीय सड़क का निर्माण पूरा किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुंबई को वैश्विक ‘फिनटेक’ (वित्त और प्रौद्योगिकी) केंद्र बनाने की दृष्टि ने राज्य में भारी निवेश आकर्षित किया है।’’ उन्होंने कुछ पार्टियों पर “मराठी-गुजराती विभाजन” पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने कभी इस तरह की राजनीति नहीं की।
शिंदे ने बताया कि 15 जनवरी को होने वाले 29 नगर निगम चुनावों से पहले, ठाणे में सात, कल्याण-डोम्बिवली और जलगांव में छह-छह सहित शिवसेना के कुल 19 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
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इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने शुक्रवार को ठाणे में विरोध प्रदर्शन किया और दावा किया कि सरकारी मशीनरी और धनबल के दुरुपयोग से हासिल की गई निर्विरोध जीत के माध्यम से मतदाताओं को “घोर धोखा” दिया गया है। पालघर-ठाणे के लिए मनसे अध्यक्ष अविनाश जाधव ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक मशीनरी की मदद से विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को “धोखाधड़ी से खारिज” कर दिया गया, जिससे शिवसेना के कुछ उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया।
उन्होंने कहा, “भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम में 18 सीट पर निर्विरोध जीत हासिल की है। इससे निवासियों में आक्रोश और असंतोष फैल गया है।’
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(भाषा)
