राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका द्वारा रूसी तेल की खरीद पर दिल्ली पर लगाए गए टैरिफ के कारण पीएम मोदी उनसे ज्यादा खुश नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत ने उन्हें बताया है कि वह अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए पांच साल से इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम इसे बदल रहे हैं, भारत ने 68 अपाचे हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया है। ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। विपक्षी दलों ने जहां इसे भारत का अपमान कहते हुए पीएम मोदी की प्रतिक्रिया मांगी है वहीं, भारत ने इस पर चुप्पी साध रखी है।

राजनयिक जगत ने ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी है और संयम और राजनीतिक परिपक्वता बरतने को कहा है। सूत्रों ने कहा कि ऐसी प्रतिक्रियाएं अक्सर विपरीत परिणाम देती हैं, खासकर तब जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अभी भी प्रक्रियाधीन है। एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर टिप्पणी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय हमें अपने व्यापारिक समझौतों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और यही हमारी प्राथमिकता है।”

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या बोले थे डोनाल्ड ट्रंप?

‘भारत ने 68 अपाचे हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया है’, दिल्ली में सरकारी सूत्रों ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि भारत ने अमेरिका से केवल 28 अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदे हैं, 22 भारतीय वायु सेना के लिए और 6 भारतीय सेना के लिए और ये सभी हेलीकॉप्टर डिलीवर किए जा चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अगस्त 2025 में भी इसी तरह की टिप्पणियां की थीं, जब ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने मोदी से कहा था कि अमेरिका आपके साथ कोई समझौता नहीं करने जा रहा है या हम आप पर इतने ऊंचे टैरिफ लगाएंगे कि आपका सिर चकरा जाएगा।

ट्रंप ने लगातार भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का भी दावा किया है। हालांकि, भारत सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा है कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं रही है। दोनों देशों के बीच DGMO लेवल पर सीधी बातचीत हुई थी।

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एस जयशंकर की ट्रंप को सलाह

बुधवार को लक्ज़मबर्ग में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वहां के भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि जो देश मीलों दूर हैं वे तनाव होने पर चिंता जताते हैं लेकिन अपने ही क्षेत्र में मौजूद जोखिमों पर ध्यान देने से इनकार करते हैं। उन्होंने कहा, “अब, बाकी दुनिया में हो रहे घटनाक्रम इसे किस हद तक प्रभावित करते हैं? यह कहना मुश्किल है। दूर बैठे लोग बातें कहेंगे, कभी सोच-समझकर, कभी बिना सोचे-समझे, कभी स्वार्थवश, कभी लापरवाही से। ऐसा होता रहेगा। अंततः, मैं आपको बता सकता हूँ आप चाहे कुछ भी कहें आज के दौर में देश ज़्यादा, मैं यह नहीं कहना चाहता कि वे ज़्यादा स्वार्थी हो गए हैं लेकिन वे तभी कुछ करेंगे जब उससे उन्हें सीधा लाभ होगा। वे आपको मुफ्त सलाह देंगे।”

विदेश मंत्री ने आगे कहा, “कभी-कभी लोग कहते हैं, जैसे कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था। अब अगर आप उनसे पूछें अरे, आपको इतनी चिंता क्यों है? अपने क्षेत्र पर ही क्यों न गौर करें और खुद से पूछें, वहां हिंसा का स्तर क्या है, कितने जोखिम उठाए गए हैं और हम बाकी लोग आपके कार्यों को लेकर कितने चिंतित हैं लेकिन यही दुनिया का स्वभाव है। लोग जो कहते हैं, वो करते नहीं। हमें इसे इसी भावना से स्वीकार करना होगा।”

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