कोविड से प्रभावित वर्ष 2020 को छोड़कर, पिछले सात वर्षों में वर्ष 2025 में दिल्ली में कण प्रदूषण (पीएम10 और पीएम2.5) की औसत सांद्रता अब तक की सबसे कम दर्ज की गई है। सीएक्यूएम ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 2021 में अपनी स्थापना के बाद से दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में विभिन्न नीतिगत उपाय और जमीनी कार्रवाई शुरू की हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि कोविड से प्रभावित वर्ष 2020 को छोड़कर, वर्ष 2025 में पीएम10 और पीएम2.5 सांद्रता के औसत मान अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। जमीनी स्तर पर निरंतर प्रयासों और अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक परिणामों के लिए लक्षित नीतिगत पहलों के साथ, यह उम्मीद की जाती है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति में साल दर साल धीरे-धीरे लेकिन उल्लेखनीय सुधार होगा।
बयान में कहा गया है कि 2018-2025 की अवधि के दौरान, दिल्ली में पीएम10 और पीएम2.5 की औसत सांद्रता 2025 में अब तक की सबसे कम दर्ज की गई, जिसमें वार्षिक औसत पीएम10 और पीएम2.5 की सांद्रता क्रमश: 198 और 97 रही।
पीएम 2.5 और पीएम 10 का क्या मतलब है
पीएम 2.5 और पीएम 10 में दिया गया अंक हवा में मौजूद कणों के आकार को माइक्रोमीटर में बताता है। पीएम 2.5 वे कण होते हैं जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण मुख्य रूप से धुएं से उत्पन्न होते हैं, जैसे वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा या पराली जलाना। ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए अधिक खतरनाक माने जाते हैं। वहीं पीएम 10 वे कण होते हैं जिनका आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। इनमें धूल, मिट्टी, सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले कण शामिल होते हैं। ये कण आमतौर पर नाक और गले तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं।
वैसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शुक्रवार को वायु गुणवत्ता में सुधार होने के बाद दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के इलाकों में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (जीआरएपी) के तीसरे चरण के तहत लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए। एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक गुरुवार को जहां 380 दर्ज किया गया था। वहीं, शुक्रवार शाम चार बजे 236 दर्ज किया गया, जिसके बाद तीसरे चरण को हटा दिया गया।
हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में पहले और दूसरे चरण की पाबंदियां लागू हैं और उसके तहत नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएंगी। वहीं, तीसरे चरण की पाबंदियां हटाए जाने को लेकर मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि हवा में आया सुधार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लगातार हो रही जमीनी स्तर पर कार्रवाई का नतीजा है। सिरसा ने कहा कि वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण, धूल और खुले में कचरा फेंकने जैसे हर बड़े स्रोत पर सख्त कार्रवाई की गई है। इसके साथ-साथ तकनीक का बेहतर इस्तेमाल प्रदूषण में सुधार लाने का प्रयास किया गया।
सिरसा ने कहा कि पिछले 24 घंटों में पर्यावरण विभाग और संबंधित एजंसियों ने प्रदूषण रोकने के लिए बड़े स्तर पर काम किया। इसमें वाहन प्रदूषण से जुड़े 6,596 चालान, अलग-अलग इलाकों से 12,000 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया, धूल कम करने के लिए 6,261 किमी सड़कों की मशीन से सफाई की गई। वहीं, 2,315 मीट्रिक टन सीएडंडी का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया।
