पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से ही पूरा देश गुस्से में है। पूरा देश पाकिस्तान के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई चाहता है। विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार से कहा है कि वह कार्रवाई करे और पूरा देश सरकार के साथ है। लेकिन कुछ कांग्रेस के नेताओं ने ऐसा बयान दिया जिससे उसकी किरकिरी हो रही है। कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बयान दिया है।
कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने कहा, “कुछ कांग्रेस नेता जो पहले महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं, वरिष्ठ नेताओं ने कुछ विचार व्यक्त किए हैं। कांग्रेस पार्टी का इन विचारों से कोई लेना-देना नहीं है। हम इन विचारों से खुद को अलग करते हैं। ये व्यक्तिगत विचार हैं। कांग्रेस के विचार CWC के प्रस्ताव में व्यक्त किए गए विचार हैं। सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जो विचार व्यक्त किए हैं, वही पार्टी का स्टैंड है। इस सबसे संवेदनशील समय में जैसे-जैसे स्थिति विकसित होगी, कांग्रेस कार्यसमिति, कांग्रेस अध्यक्ष, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पार्टी की स्थिति को स्पष्ट करेंगे।”
जानें किस नेता ने क्या बोला था
वहीं आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा, “पाकिस्तान के लिए सिंचाई और पीने के लिए पानी बहुत जरूरी है। अगर नदी के पानी को डायवर्ट नहीं किया गया तो पंजाब और जम्मू-कश्मीर राज्य पूरी तरह डूब जाएंगे। सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच कई युद्धों के बाद भी बनी हुई है। यह जल संधि पाकिस्तान की जीवन रेखा है। अगर पाकिस्तान यह स्टैंड लेता है कि पहलगाम हमले में उनका हाथ नहीं है, तो हमें पाकिस्तान की बात मान लेनी चाहिए।” हालांकि अब वह अपने बयान से पलट गए और कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया।
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युद्ध की कोई जरूरत नहीं है- सिद्धारमैया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को होना ही चाहिए था, लेकिन वे तब बिहार के चुनावी प्रचार में व्यस्त चल रहे थे। उन्होंने कहा था, “सवाल तो उठता है कि उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है। वे लोगों को टोपी पहना रहे हैं। हम तो मानते हैं कि युद्ध की कोई जरूरत नहीं है, हमें सिर्फ कड़े कदम उठाने पड़ेंगे, सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है।”
वहीं कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि क्या 22 अप्रैल को हुआ आतंकी हमला ‘विभाजन के अनसुलझे सवालों’ का नतीजा था। उन्होंने कहा था, “आज तक हम उस बंटवारे के नतीजों के साथ जीने को मजबूर हैं। आज के हिंदुस्तान में क्या एक मुसलमान को लगता है कि उसे स्वीकार किया जाता है? क्या एक मुसलमान को लगता है कि उसका सम्मान हो रहा है? हमें सवालों के जवाब खोजने चाहिए, किसी भी मुसलमान से पूछेंगे तब भी जवाब मिल ही जाएंगे।”
