Indore Water Contamination News: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से आठ लोगों की मौत हो गई है। इसने छह महीने के मासूम की भी जान छीन ली। सुनील साहू और उनकी पत्नी दस साल से बेटे की कामना कर रहे थे। छह महीने पहले आखिरकार उनकी प्रार्थना पूरी हुई।

सुनील की आवाज में दुख साफ झलक रहा था जब उन्होंने अपने बेटे के आखिरी पलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “उसे दस्त और बुखार था। हम उसे डॉक्टर के पास ले गए और वह दो दिन तक ठीक रहा। अचानक, रात में उसे बहुत तेज बुखार हो गया। उसने उल्टी की और फिर घर पर ही उसकी मौत हो गई।”

मरने वालों में से ज्यादातर की हालत बिगड़ने से पहले वे स्वस्थ थे। इनमें 31 साल की उमा कोरी भी शामिल थीं। वह अपने पति बिहारी कोरी के साथ भागीरथपुरा में एक छोटे से किराए के मकान में रहती थीं। रविवार शाम को बिहारी काम से घर लौटते समय एक स्थानीय दुकान पर रुके और अपनी पत्नी के लिए जलेबी खरीदी। लेकिन अगले दिन तड़के करीब 3 बजे उमा को उल्टी होने लगी। पहले तो स्थिति सामान्य लग रही थी और दंपति ने सोचा कि यह सामान्य फूड पॉइजनिंग का मामला है। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ उनकी हालत बिगड़ती चली गई, लगातार उल्टी होने लगी और उन्हें पानी की कमी होने लगी।

करीब 11 बजे उमा बेहोश हो गईं। उनके देवर उन्हें बाइक पर अस्पताल ले गए जबकि उनके पति ने उनके बेजान शरीर को थामे रखा। उनके पति ने बताया, “जब तक हम अस्पताल पहुंचे, तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।”

मंजुला वाधे ने अपने परिवार के लिए खाना बनाया था

एक अन्य पीड़ित मंजुला वाधे ने सोमवार रात अपने परिवार के लिए खाना बनाया था। आधी रात के आसपास उन्हें उल्टी होने लगी, जिसके बाद दस्त भी शुरू हो गए। उनके पति दिगंबर वाधे पूरी रात उनकी देखभाल करते रहे, इस उम्मीद में कि उनकी बीमारी ठीक हो जाएगी। लेकिन सुबह तक उनकी हालत और बिगड़ गई। परिवार उन्हें तुरंत इंदौर के एमवाई अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दिगंबर ने कहा, “हमारे इलाके में पिछले कुछ दिनों से पानी की समस्या बनी हुई है। मेरी पत्नी की मौत के लिए प्रशासन जिम्मेदार है।” एक अन्य पीड़ित सीमा प्रजापत की उम्र 50 साल थी। उनके भाई जितेंद्र के अनुसार, सोमवार तड़के करीब 4 बजे उन्हें उल्टी शुरू हुई। उनकी हालत इतनी तेजी से बिगड़ी कि सुबह 9 बजे तक परिवार उन्हें अस्पताल ले जा रहा था। पांच घंटे बाद उनकी मृत्यु हो गई।

ये भी पढ़ें: सबसे स्वच्छ शहर में जहरीला पानी, इंदौर ने फिर याद दिलाया, तमगे नहीं, जान ज्यादा जरूरी

सीमा को पहले से कोई बीमारी नहीं थी- जितेंद्र

जितेंद्र और परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि सीमा को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। उन्होंने यह शिकायत भी उठाई जो अब भागीरथपुरा में आम हो गई है, “पिछले एक हफ्ते से इलाके में आने वाले पानी से नाले की बदबू आ रही है।” शुक्रवार शाम को 70 साल की उर्मिला यादव को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। उनके बेटे संजय ने बताया कि उन्हें अगली सुबह क्लॉथ मार्केट अस्पताल में भर्ती कराया गया और वे एक दिन तक आईसीयू में रहीं। रविवार सुबह करीब 11 बजे उनका निधन हो गया।

उनकी बहू चंद्रकला यादव ने बताया, “27 दिसंबर को नल का पानी पीने के बाद उन्हें गंभीर दस्त हो गए। अगले दिन उनका देहांत हो गया। वह अक्सर कहती थीं कि पानी का स्वाद अजीब है, लेकिन हमने कभी सोचा भी नहीं था कि यह इतना खतरनाक हो सकता है।” परिवार के मुताबिक, 75 साल के नंदलाल को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी और वे रोजाना दवाइयां नहीं लेते थे। रविवार को उन्हें वर्मा अस्पताल में भर्ती कराया गया और मंगलवार सुबह उनका निधन हो गया। अस्पताल अधिकारियों ने पहले बताया था कि उनकी मृत्यु कार्डियेक अरेस्ट से हुई है, लेकिन बाद में उन्होंने पुष्टि की कि दूषित पानी ने इसमें भूमिका निभाई। उनके बेटे सिद्धार्थ ने कहा, “हमें लगा था कि उन्होंने कुछ खा लिया होगा; हमने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस पानी को हम रोज पीते हैं, उससे उनकी जान जा सकती है।”

ये भी पढ़ें: लोग चिल्लाते रहे, प्रशासन सोता रहा… इंदौर में दूषित पानी से हुईं मौतों की इनसाइड स्टोरी