गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर को लेकर बीजेपी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस को घेरा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने पंडित नेहरू के पुराने पत्रों का हवाला देते हुए बताया कि वह सोमनाथ मंदिर को पसंद नहीं करते थे। सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी कहा कि नेहरू ने 1951 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को प्रिय नवाबजादा कहकर संबोधित किया और सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को पूरी तरह से झूठ बताया।

नेहरू जी से हमारा कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं- भाजपा

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “यहां पर मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी से हमारा कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, जो विरोध है, वो सैद्धांतिक और व्यवहारिक है। जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था हैं, उसी प्रकार जवाहरलाल नेहरू केवल एक नेता नहीं बल्कि एक विचारधारा के प्रतीक हैं और आज यह समझना आवश्यक है कि वह विचारधारा भारत के लिए कितनी भयानक और डरावनी थी, और उसे धोखे के पर्दे के पीछे कितना छिपाया गया था। यह दुखद है कि अप्रैल 1951 में नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को ‘मेरे प्रिय नवाबजादे’ कहकर संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोमनाथ मंदिर के दरवाजों को भारत वापस लाए जाने की कहानी पूरी तरह से झूठी है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।”

लियाकत अली खान को नेहरू ने लिखा था पत्र

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि लियाकत अली खान के प्रति सम्मान से अभिभूत होकर वे लिखते हैं कि मैं यह बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि जो सोमनाथ मंदिर में हो रहा है, वह गलत है और इसके लिए कोई दुष्प्रचार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के दरवाजों को अफगानिस्तान से वापस लाए जाने की बात बिल्कुल झूठी है, इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

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सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “खुद कांग्रेस सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से पब्लिश एल.एस. बख्शी की महाराजा रणजीत सिंह किताब में सरकार कह रही है कि रणजीत सिंह जी ने काबुल जीतने के बाद संधि में एक शर्त यह भी रखी थी कि गजनी द्वारा लूटे गए सोमनाथ मंदिर के दरवाजों को भारत लौटाया जाए। अब नेहरू जी जो लियाकत अली की खिदमत में लगे हुए थे, वे सच बोल रहे थे या भारत सरकार के मंत्रालय द्वारा प्रकाशित बात सत्य है, यह प्रश्न खड़ा होता है।”

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि के.एम. पणिक्कर उस समय चीन में राजदूत थे। सुधांशु ने कहा, “पणिक्कर को लिखे लेटर में नेहरू जी कहते हैं कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण गलत है। पणिक्कर जी ने जो पत्र नेहरू जी को लिखा था, उसमें यह भाव था कि यदि चेयरमैन माओ को यह सब पता लगेगा तो उन्हें कैसा लगेगा? धर्म को अफीम मानने वाले माओवादियों को लेकर क्या अनुराग है। मुस्लिम लीगियों के लिये अजीज मिजाज और हिंदू मान-बिंदुओं पर गिरती गाज है।”

कांग्रेस को सुधांशु ने घेरा

कांग्रेस को घेरते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “जो मानसिकता उस समय थी, वही मानसिकता आज भी दिखाई दे रही है। मुस्लिम लीगी मानसिकता से प्यार और माओवादी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से करार, और सनातन हिंदू धर्म पर भीषण प्रहार। जो तब था, वही अब है। जो तब हो रहा था, वही आज हो रहा है। इसलिए आज इसकी प्रासंगिकता और मानसिकता दोनों ही अत्यंत गंभीर हैं।”