बंगाल में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी अपनी तैयारी में जुट गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 3 दिन के बंगाल दौरे पर थे और उन्होंने पार्टी की कोर कमेटी की बैठक भी की। इस बैठक में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को भी अमित शाह ने आमंत्रित किया और उनसे बात की। दिलीप घोष फिर से पूरी तरह से एक्टिव हो गए हैं और पार्टी के लिए चुनाव प्रचार की कमान संभालने वाले हैं।
दिलीप घोष ने प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य से की मुलाकात
दिलीप घोष ने गुरुवार को पार्टी के सॉल्ट लेक ऑफिस में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार अमित शाह और दिलीप घोष ने प्रचार कार्यक्रम पर चर्चा की। दिलीप घोष 6 जनवरी को एक रैली कर सकते हैं। वहीं उसके बाद 16 जनवरी को भी एक जनसभा को संबोधित कर सकते हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने पहले एक रिपोर्ट की थी कि प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य, दो पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए कोर टीम बनाएगी।
दिलीप घोष 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। हालांकि उस चुनाव में हार के बाद वह पहले की तरह एक्टिव नहीं दिखे। अब दिलीप घोष 6 जनवरी को बैरकपुर में एक रैली कर सकते हैं। एक हफ्ते बाद वह सामिक भट्टाचार्य के साथ दुर्गापुर में एक और रैली कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि दिलीप घोष 13 जनवरी को उत्तरी बंगाल में बीजेपी के गढ़ कूचबिहार में भी एक रैली करने वाले हैं।
छोटी-छोटी रैलियां करवाएगी बीजेपी
दिलीप घोष पूरे राज्य में छोटी-छोटी रैलियां करेंगे। दिलीप घोष ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मुझे क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन मैंने उन्हें (पार्टी नेतृत्व) बताया है कि मैं 24×7 उपलब्ध हूं। पहले, पार्टी ने मुझे कई जिम्मेदारियां दीं और मैंने वह भूमिका निभाई। पद बदलते रहते हैं, और पार्टी आगे बढ़ती है। पार्टी ने मुझे चुनावों के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया है और मैं यहां हूं। अमित शाह ने चुनाव की तैयारियों में जुट जाने का निर्देश दिया है। कुछ हथियारों का इस्तेमाल खास समय पर किया जाता है।”
दिलीप घोष ने आगे कहा, “हमें पूरे राज्य में 294 निर्वाचन क्षेत्रों को कवर करना है। इसलिए लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें अलग-अलग बैठकें भी करनी होंगी।” दिलीप घोष खड़गपुर से पूर्व विधायक हैं। दिलीप घोष ने कहा कि अगर पार्टी उन्हें टिकट देती है तो वह आने वाले विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने और हारने पर उन्होंने कहा, “पिछली बार मुझे ऐसी जगह से टिकट दिया गया था जो मुझे पसंद नहीं थी। मेरी पसंदीदा जगह हमेशा खड़गपुर है।”
सुवेंदु के साथ मंच शेयर करने में कोई दिक्कत नहीं- दिलीप घोष
दिलीप घोष ने कहा कि बीजेपी में नए शामिल होने वालों को पार्टी के काम करने के तरीके के हिसाब से ढलना होगा। पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ मंच साझा करने में कोई दिक्कत नहीं है। कहा जाता है कि दोनों नेताओं के संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं। (पढ़ें बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव से नाराज हुए संजय निरुपम)
दिलीप घोष के अनुसार 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का नतीजा शायद अच्छा नहीं रहा हो, लेकिन ज़्यादा लोग पार्टी में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमने समय के साथ विधानसभा और लोकसभा दोनों में अपनी सीटें बढ़ाई हैं। दूसरी पार्टियों के कई और नेता भी हमसे जुड़े हैं। पश्चिम बंगाल के लिए बीजेपी ही एकमात्र विकल्प है। कुछ भी असंभव नहीं है। हम ओडिशा और त्रिपुरा में सत्ता में आए हैं।” दिलीप घोष ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वह पार्टी के लिए 24×7 उपलब्ध हैं।
मंदिर-मस्जिद पर दिलीप घोष की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता के पास न्यू टाउन में एक और मंदिर परिसर (दुर्गा आंगन) की नींव रखने पर दिलीप घोष ने कहा, “मैंने सुना था कि दुर्गा आंगन बनाया जा रहा है, लेकिन फिर मैंने सुना कि जगह बदल दी गई है। एक मंदिर बना रहा है, दूसरा मस्जिद बना रहा है। लेकिन लोगों को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। जब नौकरियां नहीं हैं, कोई इंडस्ट्री नहीं है, तो TMC ध्यान भटकाना चाहती है, लेकिन हम चिंतित नहीं हैं।” बीते साल अप्रैल 2025 में दिलीप घोष ने दीघा में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन के दौरान टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी से मुलाकात की थी, जो पार्टी के अंदरूनी लोगों को पसंद नहीं आया था।
