Alankar Agnihotri News: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों से गहरी असहमति जताते हुए सेवा से इस्तीफा दे दिया। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने कहा कि ये नियम जाति आधारित असंतोष को भड़का सकते हैं। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को काला कानून बताते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर रहे हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफा देने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन से फोन पर बात की है।

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अलंकार अग्निहोत्री से कहा, “हम लोगों के मन में दो तरह की प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। एक तो दुख हो रहा है कि कितनी मेहनत और लग्न से आपने पढ़ाई की होगी तब जाकर आप इस पद पर आए होंगे। आज एक झटके में आपका पद चला गया लेकिन दूसरी तरफ आपने जिस तरह सनातन धर्म के प्रतीकों के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन किया है उससे पूरा सनातनी समाज आह्लादित है। हम चाहते हैं कि आपके जैसे निष्ठावान लोग सनातन धर्म की सेवा के लिए आगे आएं। जो पद आपको सरकार ने दिया था उससे बड़ा धर्म के क्षेत्र में हम आपको देने का प्रस्ताव रखते हैं।”

गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियम ब्राह्मणों के खिलाफ अत्याचारों को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और सामाजिक अशांति और आंतरिक असंतोष को जन्म दे सकते हैं। अग्निहोत्री ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पवित्र स्नान करने से रोके जाने जैसी हाल की घटनाओं का भी जिक्र किया और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाया।

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डीएम पर लगाया बंधक बनाने का आरोप

जिला मजिस्ट्रेट के आवास से निकलने के बाद, अग्निहोत्री ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि वह बरेली के जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह से उनके घर पर मिलने गए थे, जहां कथित तौर पर उन्हें बंधक बना लिया गया था। अग्निहोत्री ने कहा, “मुझे डीएम के आवास पर 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। डीएम को लखनऊ से फोन आया। मुझे अपशब्द कहे गए और उन्होंने कहा, ‘पंडित पागल हो गया है। इसे पूरी रात बंधक बनाकर रखो।’ मैंने पहले ही मीडिया को अपनी स्थिति के बारे में सूचित कर दिया था। मुझे एसएसपी के कहने पर रिहा किया गया।”

डीएम ने आरोपों का खंडन किया

आरोपों का खंडन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने कहा कि जब अग्निहोत्री उनसे मिलने आए थे, तब सभी एडीएम, एसडीएम, सर्किल अधिकारी, एलआईयू के अधिकारी और बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डीएम के आवास पर मौजूद थे। जिला मजिस्ट्रेट सिंह ने अग्निहोत्री के बंधक बनाए जाने के दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि बातचीत के दौरान उनके साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया गया था।

क्या हैं यूजीसी के नए नियम?

यूजीसी के नए कानून के तहत अब विश्वविद्यालय या कॉलेज में पढ़ने वाले ओबीसी, एससी, एसटी के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी अपने साथ होने वाले जातिगत भेदभाव या उत्पीड़न की शिकायत सक्षम प्राधिकारी के सामने दर्ज करा सकेंगे। पहले सिर्फ जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें एससी और एसटी समाज के छात्रों तक ही सीमित थीं। आखिर यूजीसी के नए नियम को लेकर पूरे विवाद को समझने के लिए यहां क्लिक करें…