महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम एक सरप्राइज फैक्टर के तौर पर उभरी है। AIMIM ने राज्य की 13 नगर निगमों में 126 कॉर्पोरेटर सीटें जीती हैं। छत्रपति संभाजीनगर और मालेगांव जैसे शहरों में उसने जबरदस्त जीत हासिल की है। ये नतीजे लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी के कमज़ोर प्रदर्शन के बाद एक बड़ी वापसी का संकेत देते हैं। ये नतीजे AIMIM की मुस्लिम बहुल इलाकों में बढ़ती मौजूदगी को दिखाता है। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पार्टी के प्रदर्शन, अल्पसंख्यक वोटरों की बदलती राजनीतिक पसंद और आगे की राह पर बात की।

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सवाल: AIMIM ने महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में 126 सीटें जीती हैं, जो राज्य के नगर निगमों में उसकी पिछली सीटों से लगभग दोगुनी हैं। इस बेहतर प्रदर्शन का श्रेय आप किसे देते हैं?

जवाब: हम हर जगह एक्टिव रहे, यहां तक कि उन जगहों पर भी जहां हम संसदीय और विधानसभा चुनावों में नहीं जीते थे। हम लोगों से मिलते रहे, उनकी समस्याओं पर काम किया और कई जनसभाएँ आयोजित कीं। हमारे नेताओं ने बड़े पैमाने पर यात्राएँ कीं। संसदीय चुनावों में BJP और तथाकथित सेक्युलर पार्टियाँ दोनों इम्तियाज़ जलील को हराने के लिए एक साथ आ गईं। फिर भी उन्हें 3 लाख से ज़्यादा वोट मिले। लगभग डेढ़ महीने पहले नगर निगम चुनावों में, हमने 85 सीटें जीतीं। यह अल्लाह की मेहरबानी और लोगों का भरोसा है। सभी ने बहुत मेहनत की। हमने ज़ोरदार चुनाव प्रचार किया। हैदराबाद से हमारे विधायक महाराष्ट्र आए और जनसभाएँ कीं। हमारे सभी नेता सोलापुर, लातूर, नांदेड़, परभणी, धुले और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में फैल गए।

सवाल: हम देख रहे हैं कि मुस्लिम बहुल शहर समुदाय के सदस्यों के नेतृत्व वाली पार्टियों को वोट दे रहे हैं। क्या यह मुस्लिम वोटरों का सेक्युलर पार्टियों से दूर जाने का एक निर्णायक बदलाव है, या यह पूरी तरह से स्थानीय, नगर निगम स्तर की घटना है?

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जवाब: आप किस तरह की सेक्युलर पार्टियों की बात कर रहे हैं? मालेगांव में मुफ्ती साहब (मोहम्मद इस्माइल अब्दुल खालिक) हमारे विधायक हैं। गोविंदी में हमने आठ में से ज़्यादातर सीटें जीती हैं। औरंगाबाद में हमारे हिंदू उम्मीदवार ने जीत हासिल की है। आप हर चीज़ को सिर्फ़ एक धर्म के नजरिए से नहीं देख सकते। AIMIM की जीत को धर्म के नज़रिए से देखना गलत है। तो फिर आप BJP की जीत को क्या कहेंगे?

सवाल: कई नगर निगमों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों को पहले अल्पसंख्यक वोट मिलते थे, लेकिन इस बार उनका प्रदर्शन खराब रहा है। आपको क्या लगता है कि ऐसा क्यों हुआ?

जवाब: इसका जवाब सिर्फ़ वही दे सकते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। हम अपना काम कर रहे हैं और लोग चुनने के लिए आज़ाद हैं। चुनाव पसंद या नापसंद जाहिर करने का सबसे अच्छा तरीका है। वे तीन बार हार चुके हैं और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हुए हैं। वे महाराष्ट्र में भी तीन बार हारे हैं। क्या उनके पास कोई जवाब है? आपके पास क्या बचा है? वोटरों को, खासकर युवाओं को यह एहसास हो गया है कि उन्हें एक ऐसी पार्टी चाहिए जो उनके विचारों को आगे बढ़ा सके और नई लीडरशिप को उभरने में मदद कर सके। मुस्लिम और दलित इलाके अच्छी तरह से डेवलप नहीं हैं। कई इलाकों में पांच दिन में एक बार पानी आता है और लोगों को पीने का पानी खरीदना पड़ता है, जबकि बीजेपी दावा करती है कि उसकी ट्रिपल-इंजन सरकार है। ये ऐसे मुद्दे हैं जो लोगों को परेशान करते हैं। मुसलमानों के खिलाफ अत्याचारों पर सेक्युलर पार्टियों की चुप्पी भी नजरअंदाज नहीं हुई है। अकोला में मेरे काफिले को कुछ युवाओं ने रोका और उन्होंने मुझसे कहा कि वे हमें वोट देंगे। उन्होंने कहा कि जब अकोला में सांप्रदायिक दंगे हुए, तो सिर्फ़ AIMIM ही आई और उनकी मदद की। UAPA के तहत मुस्लिम युवाओं की जेल के बारे में कोई बात नहीं करता। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से यह बदलाव आया है।

सवाल: मालेगांव में ISLAM पार्टी सबसे बड़े ग्रुप के तौर पर उभरी है और AIMIM दूसरे नंबर पर आई है। क्या आप कॉर्पोरेशन चलाने के लिए उनके साथ गठबंधन करने को तैयार हैं?

जवाब: यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब सिर्फ़ मुफ्ती इस्माइल दे सकते हैं। मैं इस पर जवाब देने की स्थिति में नहीं हूं। वह वहां पार्टी संभाल रहे हैं और यह उनका फैसला होगा। वह जो भी फैसला लेंगे, वह मुझे मंज़ूर होगा।

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सवाल: शहरी महाराष्ट्र में इस चुनावी माहौल को देखते हुए, क्या AIMIM अब खुद को राज्य-स्तरीय राजनीति में एक बड़ी भूमिका निभाते हुए देखती है, या फोकस म्युनिसिपल गवर्नेंस और ज़मीनी स्तर पर विस्तार पर रहेगा?

जवाब: जलील साहब सिर्फ़ 1,100 वोटों से विधानसभा चुनाव हार गए। नासिर सिद्दीकी भी बहुत कम अंतर से हारे। शिवाजी नगर-माखुर्द में हम विधानसभा में 11,000 वोटों से हार गए। लेकिन अगर आप इस बार के सिविक पोल के वोटों को देखें, तो हम उस सीट से 20,000 वोटों से जीत रहे हैं। धुले में हमारा उम्मीदवार पहले अजित पवार के पास चला गया था। अब हमारे पास वहां 12 कॉर्पोरेटर हैं। यह दिखाता है कि जमीन पर हमारी मजबूत पकड़ है और इन नगर निगम चुनावों से हमें बहुत जरूरी गति मिली है।अब हम ज़िला परिषद चुनावों की तैयारी कर रहे हैं। हम आज की जीत पर आराम से नहीं बैठ सकते। जैसा कि सुनील गावस्कर ने एक बार कहा था, सेंचुरी बनाने के बाद अगले दिन आपको फिर से ज़ीरो से शुरू करना होता है। हमें भी ज़ीरो से शुरू करना है, ज़मीन पर काम करना है और इस गति का इस्तेमाल करके राज्य में पार्टी को और आगे बढ़ाना है।

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