दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में विवादों का सामना कर रहे हैं। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 6वां समन भेजा है और केजरीवाल को 19 फरवरी को ईडी के सामने पेश होना होगा। इसके पहले अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में अपनी ही सरकार के पक्ष में विश्वास प्रस्ताव ले आए हैं। माना जा रहा है कि विश्वास मत के जरिए अरविंद केजरवाल और आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपना शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही है।

दरअसल, पिछले दिनों ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि बीजेपी के कुछ नेता उनके विधायकों से संपर्क कर रहे हैं। केजरीवाल का आरोप था कि बीजेपी आप विधायकों की खरीद फरोख्त की कोशिश कर रही है जिससे उनकी सरकार गिराई जा सके। हाल ही में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र भी मार्च के पहले हफ्ते तक के लिए बढ़ाने का ऐलान किया था और अब वे विधानसभा में विश्वास मत ले आए हैं।

अहम बात यह है कि दिल्ली विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण के समय बीजेपी विधायकों ने व्यवधान डाला था। अब बीजेपी के सात विधायकों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है। बीजेपी विधायकों ने उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान व्यवधान डाला था क्योंकि सीएम केजरीवाल लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहे थे। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने व्यवधान का मामला विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया गया है।

आप नेता और विधायक दिलीप पांडे ने बीजेपी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रस्ताव रखा था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया था। इसके चलते बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्ट, ओपी शर्मा, अजयर महावर, अभय वर्मा, अनिल वाजपेई, जीतेंद्र महाजन और विजेंद्र गुप्ता को सदन से निलंबित कर दिए गए हैं।

अरविंद केजरीवाल का विश्वास मत लाने का ऐलान इसलिए भी अहम है क्योंकि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच उनसे विधायकों की खरीद फरोख्त से जुड़े मामले के सबूत मांग रही है। हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि दिल्ली सरकार कब विधानसभा के पटल पर विश्वास प्रस्ताव लाए हैं।