प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सोमवार को अहमदाबाद में मुलाकात होगी। इस दौरान भारत और जर्मनी के बीच सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा-सुरक्षा सहयोग और कौशल विकास से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस बात की जानकारी इंडियन एक्सप्रेस को मिली है।

मई में पद संभालने के बाद यह चांसलर मर्ज की भारत की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। उनके साथ 25 बड़े उद्योगपतियों और सीईओ का एक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। इसमें एक बड़ी पनडुब्बी बनाने वाली कंपनी के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हैं, जिससे साफ है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को भी मजबूत करने पर जोर रहेगा।

दोनों देश एक नया रक्षा और सुरक्षा रोडमैप पेश करेंगे। इसका मकसद भारत में रक्षा उपकरण बनाने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके साथ ही हैदराबाद में एक कौशल विकास केंद्र खोलने की योजना को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।

जर्मन चांसलर बनने के बाद मर्ज ने सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की थी। इसके बाद दोनों नेता दो बार आमने-सामने मिल चुके हैं। पिछले साल जून में कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान और नवंबर में दक्षिण अफ्रीका में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चांसलर मर्ज़ की यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों की शुरुआत मानी जा रही है। अभी यूरोपीय संघ के नेता गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए भारत आए हुए हैं। इसके बाद फरवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी दिल्ली आएंगे, जहां वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

यूरोपीय संघ का संपर्क

जर्मन चांसलर की यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। कुछ हफ्तों बाद यूरोपीय संघ के नेता और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी भारत आने वाले हैं। यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत और यूरोप की राय अलग-अलग है, लेकिन दोनों पक्ष इन मतभेदों को कम करने और सहयोग बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

इस साल के अंत में प्रधानमंत्री मोदी अपने कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के साथ जर्मनी जाने की योजना बना रहे हैं, जहां दोनों देशों के बीच अंतर-सरकारी स्तर की बातचीत होगी। चांसलर मर्ज़ सोमवार सुबह अहमदाबाद पहुंचेंगे और महात्मा मंदिर में प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु होगी। सूत्रों ने बताया कि पिछले 25 वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रक्षा संबंधों को उच्च स्तर के पारस्परिक विश्वास और भरोसे ने दिशा दी है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की रक्षा तैयारियों के लिए जर्मनी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही प्रौद्योगिकी भी वार्ता का हिस्सा होगी।

दोनों नेता यूक्रेन युद्ध पर भी बात करेंगे। जर्मनी इस मामले में रूस के खिलाफ यूरोप में ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ का हिस्सा रहा है। इसके साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया कदमों पर भी चर्चा होगी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलना और दुनिया की मौजूदा नियम-आधारित व्यवस्था को कमजोर करना शामिल है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी और ग्रीनलैंड को लेकर बयान जैसे मुद्दे भी बातचीत में आ सकते हैं। भारत और जर्मनी दोनों एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहां कई देश मिलकर संतुलन बनाए रखें, न कि कोई एक देश हावी हो।

चीन को लेकर भी दोनों देशों की राय अलग है। भारत चीन को अपनी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानता है, जबकि जर्मनी उसे एक अहम व्यापारिक साझेदार के रूप में देखता है। इन मतभेदों पर भी चर्चा होगी।

दोनों नेता भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी बात करेंगे। उम्मीद है कि यह समझौता 26–27 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड और भारत-ईयू शिखर सम्मेलन से पहले लगभग तय हो जाएगा। इस दौरान यूरोपीय संघ की प्रमुख नेता उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा भी दिल्ली आएंगे।

जर्मन चांसलर मर्ज़ से बातचीत से इस समझौते को आगे बढ़ने में मदद मिलने की उम्मीद है, क्योंकि जर्मनी की बड़ी कार कंपनियां भारत में अपना कारोबार बढ़ाना चाहती हैं। सूत्रों के अनुसार, जर्मनी को “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में भारत का एक अहम साझेदार माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, द्विपक्षीय वार्ता इन प्रमुखों मुद्दों पर आधारित होगी

जर्मनी और मेक इन इंडिया: भारत में इस समय 2,000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। कई और जर्मन कंपनियां भी “मेक इन इंडिया” से जुड़ना चाहती हैं। जर्मनी भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, टिकाऊ शहरी परिवहन, मेट्रो और सोलर रूफटॉप जैसी बड़ी परियोजनाओं में मदद कर रहा है।

जर्मनी और स्किल इंडिया: जर्मनी कौशल विकास में भारत का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय साझेदार है। सूत्रों के अनुसार, कई जर्मन संस्थाएं भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। जर्मन सरकार नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े पेशेवरों के लिए कौशल केंद्र बनाने में मदद करेगी।

जर्मनी और हरित भारत: जर्मन कंपनियां भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और हरित बुनियादी ढांचे में पहले से काम कर रही हैं। खासकर ग्रीन हाइड्रोजन और उससे जुड़े क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ेगा।

नई तकनीक में साझेदारी: जर्मनी अब भारत को उन्नत तकनीक देने वाला एक बड़ा देश बन गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिजिटल और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

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छात्र और पेशेवर: लगभग 60,000 भारतीय छात्र जर्मनी में पढ़ रहे हैं, खासकर विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों में। दोनों देश छात्रों और लोगों की आवाजाही बढ़ाने पर बात करेंगे। भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी में पढ़ाई को आसान बनाने के लिए कुछ नई सुविधाओं पर भी विचार हो रहा है। जर्मनी भारतीय कुशल पेशेवरों को काम के लिए भी आमंत्रित कर रहा है, जो भारत के लिए अच्छी खबर है।

संयुक्त राष्ट्र सुधार: दोनों नेता संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर भी चर्चा करेंगे।क्योंकि दोनों देश जी-4 समूह का हिस्सा हैं। जिसमें जापान और ब्राजील भी शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल होने के लिए पैरवी कर रहा है।

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