Uddhav Thackeray Interview: राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विपक्षी गठबंधन के दलों के बीच तालमेल की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को माना कि इंडिया ब्लॉक और राज्य की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर “भ्रम” है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि चीजें जल्द ठीक हो जाएंगी।

महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में उद्धव ठाकरे ने इंडिया ब्लॉक और एमवीए के भविष्य से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा, “निश्चित रूप से असमंजस की स्थिति है। यह मौजूद है। लेकिन धीरे-धीरे यह असमंजस दूर हो जाएगा। इसके लिए समय चाहिए। कुछ भी रातोंरात नहीं होता।”

उद्धव ठाकरे ने कहा, “हां, भ्रम की स्थिति है। मैं इससे इनकार क्यों करूं? लेकिन मुझे उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा। अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक है। लेकिन इंडिया गठबंधन बरकरार रहेगा।”

उनकी ये टिप्पणियां महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के लिए बदलते गठबंधनों और बिहार में इंडिया ब्लॉक को मिले चुनावी झटके के मद्देनजर आई हैं, जिसने विपक्षी सहयोगियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर दिया है और आत्मनिरीक्षण और रणनीतियों की समीक्षा की मांग को जन्म दिया है।

जब ठाकरे से पूछा गया कि क्या इन घटनाक्रमों के बावजूद विपक्षी सहयोगी अभी भी एकजुट हो सकते हैं? उन्होंने कहा कि एकता तभी संभव है जब सभी घटक एक समान सिद्धांत का पालन करें। उन्होंने कहा कि यदि सभी ‘देश प्रथम’ को स्वीकार करें, तो सभी एक साथ आ जाएंगे।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया ब्लॉक और महाराष्ट्र में एमवीए दोनों ही “अस्पष्टता” की स्थिति से गुजर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “समय के साथ, सब कुछ फिर से ठीक हो जाएगा”।

महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण नगर निकाय चुनावों में, एमवीए के सहयोगी दलों ने कई नगर निगमों में अलग-अलग रास्ते अपनाए हैं। कांग्रेस ने शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के साथ गठबंधन किए बिना, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और अन्य नगर निकाय चुनावों में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

दूसरी ओर, जुलाई 2023 में पार्टी में हुए विभाजन के बाद प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद, अजित पवार और शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुटों ने कम से कम दो नगर निगमों, पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में एक साथ आने का फैसला किया है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के चुनाव अभियान का प्रबंधन करने वाली फर्म I-PAC पर ईडी की छापेमारी के बारे में बोलते हुए ठाकरे ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय जांच एजेंसियों के “दुरुपयोग” का मामला है। उन्होंने कहा कि ममता जी ने जो किया वह सही था। प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो का दुरुपयोग हो रहा है। पूर्व मामलों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए उद्धव ठाकरे केंद्र में सत्ताधारी पार्टी को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि जो भी उनके साथ जुड़ता है, उसे क्लीन चिट मिल जाती है। यह सत्ता का दुरुपयोग है और इसका विरोध होना चाहिए।

भाजपा को लेकर उद्धव ने क्या कहा?

जब उद्धव ठाकरे से भाजपा के साथ समझौते की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि राज ठाकरे के साथ भले ही वे अलग हो गए थे, लेकिन मराठी पहचान, हिंदुत्व और महाराष्ट्र को लेकर उनका और राज का रुख कभी नहीं बदला। उन्होंने बताया कि दोनों ने यह महसूस किया कि उनके आपसी मतभेदों का फायदा दूसरे लोग उठा रहे हैं, इसलिए एक उद्देश्य के लिए वे फिर से साथ आए।

उद्धव ठाकरे ने कहा, “राज और मैं अलग हो गए थे, लेकिन मराठी पहचान, हिंदुत्व और महाराष्ट्र से हम में से किसी ने भी समझौता नहीं किया। अगर हमारे बंटवारे से भाजपा को फायदा होता है, तो ऐसा नहीं होना चाहिए। इसी सोच के साथ हमने फिर से एकजुट होने का फैसला किया।”

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पहले वे हिंदुत्व के कारण भाजपा के साथ थे, लेकिन अब भाजपा का हिंदुत्व उन्हें समझ में नहीं आता। उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में गौहत्या पर प्रतिबंध है, लेकिन गोवा और उत्तर-पूर्वी राज्यों में क्यों नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन पैदा करती है।

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उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे कांग्रेस के साथ जाते हैं, तो उन पर हिंदुत्व छोड़ने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन भाजपा वही काम करे तो उसे स्वीकार कर लिया जाता है। उद्धव ठाकरे ने कहा, “जब भाजपा कुछ करती है, तो उसे अमर प्रेम कहा जाता है, और जब हम करते हैं, तो उसे लव जिहाद कहा जाता है।” अंत में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा न तो आज़ादी की लड़ाई का हिस्सा रही है और न ही संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन का, बल्कि वह सिर्फ समाज में झगड़े पैदा करती है और खतरनाक है।

भाषा और पहचान संबंधी मुद्दे पर क्या बोले उद्धव?

भाषा और पहचान को लेकर पैदा हुए विभाजन के राजनीतिक मुद्दा बनने पर ठाकरे ने कहा, “हम गैर-मराठी लोगों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ हैं जो हमारे साथ अन्याय करके मुंबई को छीनने और लूटने की कोशिश कर रहे हैं । हम सभी गुजराती या उत्तर और दक्षिण भारतीयों के खिलाफ नहीं हैं। मैं अब 65 साल का हो चुका हूं। मुंबई में कई ऐसे बुजुर्ग गुजराती हैं जिनके दादा-परदादा मुंबई में रहते आए हैं। वे सभी यहां शांति और सद्भाव से रह रहे हैं।”

उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारी लड़ाई उन लोगों के खिलाफ है जो हमारे साथ अन्याय कर रहे हैं। मेरे कई गुजराती, उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय मित्र भी हैं। ऐसे शिवसैनिक भी हैं। इसलिए हम सभी के खिलाफ नहीं हैं… पिछले कई वर्षों से हम बीएमसी चला रहे हैं और इसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। हम हिंदी, उर्दू और गुजराती सहित आठ अलग-अलग भाषाओं में भी पढ़ा रहे हैं।

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