Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति का पारा इस वक्त बीएमसी यानी बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC Elections) के चलते काफी चढ़ा हुआ है। इस बीच महायुति की सरकार के ही दो सुप्रीम नेताओं के बीच टकराव है। एक मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस हैं तो दूसरा नाम डिप्टी सीएम अजित पवार का है। मुख्यमंत्री फड़नवीस के एक बयान को सांप्रदायिक बताते हुए अजित पवार ने उसकी निंदा की और कहा वे धर्मनिरपेक्ष हैं।

अजित पवार ने कहा कि भारत जैसे विविधितापूर्ण देश में हर कोई समान नागरिक है। ANI से एक इंटरव्यू में अजित पवार ने कहा कि मुझे यह बिल्कुल भी पसंद नहीं है, मेरी सोच धर्मनिरपेक्ष है। अंबेडकर जी की विचारधारा हमें यह नहीं सिखाती। मुझे बस इतना कहना है कि हमारा देश बहुत बड़ा है और जो लोग इस देश में रहते हैं वे सभी भारतीय हैं।

आज की बड़ी खबरें

अजित पवार ने याद दिलाई अंबेडकर की विचारधारा

अजित पवार ने कहा है कि अगर कोई देश के खिलाफ गद्दारी कर रहा है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और उन्हें मृत्युदंड दिया जाना चाहिए, इसके लिए एक नया कानून बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की विचारधारा का जिक्र करते हुए अजित पवार ने कहा कि हर किसी को अपना काम दिखाने और करने का अवसर मिलना चाहिए, बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें संविधान में यही बताया है और दूसरों ने भी यही कहा है।

यह भी पढ़ें: ‘…पैर काटकर दिखाओ’, तमिलनाडु के भाजपा नेता ने राज ठाकरे को दी खुली चुनौती

देवेंद्र फड़नवीस ने क्या कहा था?

अहम बात यह भी है कि पवार का यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस दावे के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीएमसी का नया मेयर “महायुति से होगा, एक हिंदू होगा और एक मराठी होगा।

विपक्ष के ‘मराठी मानुष’ के खतरे में होने के दावों का जवाब देते हुए फड़नवीस ने कहा था कि खतरा मराठी समुदाय को नहीं बल्कि कुछ राजनीतिक ताकतों के अस्तित्व को है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र सभी मराठी लोगों का है, किसी एक समूह का नहीं।

पहले अजित पवार पर भड़के थे देवेंद्र फड़नवीस

बता दें कि इससे पहले जब पुणे में नगर निगम चुनाव के दौरान एनसीपी के प्रमुख अजित पवार ने अपनी पार्टी के घोषणापत्र में मेट्रो में मुफ्त यात्रा का वादा किया था, तो उस वादे को लेकर देवेंद्र फड़नवीस ने अजित पवार का नाम लिए बिना ही आलोचना की थी. और कहा था कि जिसको जो वादा करना है, कर रहा है, लेकिन ऐसे वादे कभी हकीकत नहीं बन सकते हैं।

यह भी पढ़ें: बीजेपी ने यौन उत्पीड़न मामले में सह-आरोपी आप्टे को बनाया पार्षद, भारी विरोध होने पर देना पड़ा इस्तीफा