दिल्ली की सीमा पर डटे किसानों के आंदोलन ने 20 दिन से ज्यादा का वक्त पूरा कर लिया है। किसानों की मांग है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापिस ले। किसान चाहते हैं कि सरकार एमएसपी को कानूनी रूप दे। साथ ही साथ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करे। किसानों के मुद्दे पर आज तक पर डिबेट के दौरान जब एंकर चित्रा त्रिपाठी ने बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया से पूछा कि किसान सिर्फ कुछ राज्यों के हैं इसलिए केंद्र सरकार उनकी बात को हल्के में ले रही है। तो जवाब में बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि एक मांग और है जो कि मीडिया ने दिखाई है वो है ‘किसान उमर खालिद’ और ‘किसान शरजील इमाम’ जिन्होंने कि देशविरोधी गेहूं बोया है और नफरत की दाल उगाते हैं।
प्रवक्ता ने एंकर से पूछा कि क्या सरकार को ऐसे लोगों को रिहा कर देना चाहिए। जिनकी वजह से दिल्ली दंगों में इतने लोगों की जान चली गई। हम किसानों से बात करने को तैयार हैं। उमर और शरजील जैसे लोग छात्र नहीं है बल्कि देशविरोधी बातों और नफरत के अध्यापक हैं। इन लोगों से सरकार बातचीत नहीं कर सकती है। अभी कुछ महिलाएं नारा लगा रही थीं,’हाय हाय मोदी मर जा तू’। क्या पीएम मोदी के खिलाफ इस तरह के नारे लगाना विरोध प्रदर्शन है।
एंकर ने अकाली दल के प्रवक्ता से पूछा कि आपकी पार्टी तो बीजेपी को टुकड़े टुकड़े गैंग के नाम से बुला रही है। क्या जिस तरह के नारे लग रहे हैं क्या ये आंदोलन अपने असल मुद्दे से भटक गया है। इस पर अकाली नेता परविंदर सेठी ने कहा कि देश का किसान समझदार है और किसान नेता भी पढ़े लिखे हैं। किसानों आंदोलन बड़ा आंदोलन है। शांतिपूर्ण है। अगर ऐसे में कोई असामाजिक तत्व आकर शामिल होता है तो इसका मतलब ये नहीं कि किसान देश के खिलाफ हैं। पीएम मोदी के लिए गलत शब्दों के इस्तेमाल की हम कड़ी निंदा करते हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि किसान पंजाब में लंबे समय से प्रदर्शन कर रहा था और अब दिल्ली आया है। किसानों के आंदोलन को दबाने के लिए हर एक कोशिश केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार ने की। किसान एमएसपी की गांरटी की मांग कर रहे हैं।
