मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक और तकनीक-आधारित योजना 2028 (मिशन मोड- एक्शन प्लान) की घोषणा की है। दिल्ली सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा है। इस योजना के तहत पहली बार दिल्ली के दो बड़े नालों की ड्रोन मैपिंग की जाएगी और 47 चिन्हित हाटस्पाट पर हर महीने पानी की गुणवत्ता की जांच होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में दिल्ली के 37 सीवर शोधन संयंत्र मिलकर रोजाना 814 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) पानी साफ कर रहे हैं। हालांकि, भविष्य की आबादी और जरूरतों को देखते हुए सरकार ने दिसंबर 2028 तक इस क्षमता को 1500 एमजीडी तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। दिसंबर 2027 तक पुरानी मशीनों को तकनीकी तौर पर बेहतर करने से 56 एमजीडी की वृद्धि होगी। साथ ही 35 नए प्लांट के जरिए छोटे विकेंद्रीकृत संयंत्र लगाकर 170 एमजीडी क्षमता जोड़ी जाएगी।
बड़े योजना के तौर पर नालों के पास नए बड़े संयंत्र लगाकर 460 एमजीडी अतिरिक्त क्षमता तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि जैसे-जैसे उपचार क्षमता बढ़ेगी, यमुना में गिरने वाला दूषित पानी बंद होगा, जिससे नदी की बदबू कम होगी और जलीय जीवन फिर से लौटेगा और यमुना फिर से एक बार दिल्ली की जीवन रेखा बनेगी। यमुना में गिरने वाले प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है।
नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की ड्रोन मैपिंग जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। अन्य नालों का सर्वेक्षण जून 2026 तक संपन्न होगा। डीपीसीसी और सीपीसीबी की संयुक्त टीमें 47 हाटस्पाट पर हर महीने नमूने लेकर पानी की जांच करेंगी। औद्योगिक क्षेत्रों में लगे सीईटीपी की सख्त निगरानी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर भारी दंड और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वह जल्द ही हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर इस समस्या का साझा समाधान निकाला जाएगा। वहीं, लोक निर्माण व जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने भरोसा दिलाया कि 2028 तक सीवर तंत्र और नालों की सफाई के सभी प्रमुख कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए एक विशेष कमेटी भी गठित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अनधिकृत कालोनियों और झुग्गी बस्तियों में सीवर लाइन बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है। अभी तक 675 झुग्गी बस्ती में से 574 में काम पूरा हो चुका है, जबकि, 65 बस्तियों में सीवर को इकट्ठा करने के लिए एकल केंद्र की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, 1799 अनधिकृत कालोनियों में सीवर का काम दिसंबर 2026 से दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे गंदा पानी बिना साफ हुए यमुना में जाने से रुकेगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक दिल्ली के हर घर का कनेक्शन सीवर लाइन से नहीं होगा, तब तक गंदा पानी यमुना में गिरना बंद नहीं होगा और नदी पूरी तरह साफ नहीं हो पाएगी।
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