12 साल पहले 26 नवंबर 2008 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई दहल उठी थी। भारत के लोग वो रात कभी नहीं भूल सकते जब दस आतंकियों ने मुंबई के अलग-अलग इलाकों में अंधाधुंध फायरिंग कर सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस हमले की बरसी पर टीवी चैनल रिपब्लिक भारत के शो ‘पूछता है भारत’ में चर्चा के दौरान भारत और पाकिस्तान के पैनलिस्ट आपस में भीड़ गए।

बहस के दौरान रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य पाकिस्तानी पत्रकार को बता रहे थे कि हाफिज सईद को जेल में होना चाहिए था लेकिन वह घर पर दिन गुजर रहा है। आर्य पाकिस्तान में होने वाले फ़सादों पर बात कर रहे थे तभी एक पाकिस्तानी पैनलिस्ट ने उन्हें टोकते हुए कहा कि गौरव आर्य भाषण बंद करो… इसपर रिटायर्ड मेजर भड़क गए और कहा “ये हाफिज सईद के नौकर को क्यों बुलाया है? सुनो छोटे हाफिज़ निकलो यहाँ से… बिलकुल यहाँ से निकाल जाओ।”

इसपर पाकिस्तानी पैनलिस्ट ने कहा “मैं आपके घर पर नहीं आया हूं नेशनल टीवी पर हूं। आराम से बात करो, तुम्हें तमीज नहीं है बात करने की।” पाकिस्तानी पैनलिस्ट की बात से गौरव आर्य इतना नाराज़ हो गए कि उन्होने उसे आतंकी भी बोल दिया। इस दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल जी डी बख्शी ने पाकिस्तान को चेताया कि हम पड़ोसी नहीं बदल सकते हमारी सेना को नक्शे बदलने आता है।

रिटायर्ड मेजर ने कहा कि मुझे अफसोस है कि 26/11 की बरसी से दो दिन पहले पाकिस्तान ने एक बार ऐसी ही हरकत दोहराने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तानियों को पाठ पढ़ाया जाए। पाकिस्तान यह सोचता है कि चीन उसे बचाएगा। इस आग से वो उसे बाहर निकाल लेगा। पाकिस्तान के लोग अपना गणित सहीं कर लें।’ जी डी बख्शी ने आगे कहा कि हम पड़ोसी नहीं बदल सकते हैं लेकिन हमारी सेना को नक्शे बदना आता है।

बता दें लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने दक्षिण मुंबई के कई स्थानों को अपना निशाना बनाया था। आतंकियों ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) रेलवे स्टेशन, नरीमन हाउस कॉम्प्लेक्स, लियोपोल्ड कैफे, ताज होटल और टॉवर, ओबेरॉय-ट्राइडेंट होटल और कामा अस्पताल में हमला किया था। इस हमले में करीब 160 लोगों की जान गई थी, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 60 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों 9 आतंकियों को मार गिराया था, जबकि एक आतंकी अजमल आमिर कसाब जिंदा पकड़ा गया था। जिसे बाद में 21 नवंबर, 2012 को पुणे के यरवडा जेल में फांसी दी गई।