The first session of the 17th Lok Sabha: सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र के प्रथम दिन विपक्ष को साधने का प्रयास करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि उन्हें अपनी संख्या को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है और उनका हर शब्द सरकार के लिए ‘‘मूल्यवान’’ है। मोदी ने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे जब सदन में हों तो निष्पक्ष रहें और राष्ट्र के व्यापक हित से जुड़े मुद्दों का समाधान करें।
उन्होंने कहा, ‘‘संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। विपक्ष को अपनी संख्या को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। मुझे उम्मीद है कि वे (विपक्ष) सक्रियता से बोलेंगे और सदन की कार्यवाही में भागीदारी करेंगे।’’ पीएम ने 17वीं लोकसभा के पहले सत्र के शुरू होने से पहले संसद के बाहर मीडिया से कहा, ‘‘जब हम संसद आते हैं तो हमें पक्ष और विपक्ष को भूल जाना चाहिए। हमें निष्पक्ष भावना के साथ मुद्दों के बारे में सोचना चाहिए और राष्ट्र के व्यापक हित में काम करना चाहिए।’’
मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार पर पिछले कार्यकाल में संसद को ‘रबड़ की मोहर’ की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को उम्मीद जतायी कि इस बार यह चलन बदलेगा तथा प्रमुख विधेयकों को बहुमत के दबाव में विधायी समीक्षा के बिना पारित नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा, ‘‘लोकतंत्र में अध्यादेश के जरिये कानून बनाना बहुत अस्वस्थ परंपरा है। इसे केवल उन विरले मामलों में उपयोग करना चाहिए जहां आपात स्थिति हो। वरना सरकार को कानून बनाने की निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए।’’
शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम इस बारे में प्रधानमंत्री के आश्वासन की प्रतीक्षा नहीं करेंगे। क्या पिछले पांच साल में जो चलन अपनाया गया उसे बदला जाएगा क्योंकि पिछले पांच साल में हमने जो देखा था वह संसद का असम्मान, जहां सरकार विधेयक लाती थी और लोकसभा में उसके भारी बहुमत के कारण, संसद के साथ एक रबड़ की मोहर की तरह व्यवहार किया जाता है।’’


कांग्रेस अध्यक्ष और केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने सोमवार शाम संसद सदस्य के तौर पर पथ और गोपनीयता की शपथ ली। सदन में उस दौरान उनकी मां और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं। वहीं, मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को नाम में विवाद के चलते दो बार शपथ लेनी पड़ी।
महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत कौर राणा ने कहा कि 'जय श्रीराम' का नारा लगाने के लिए संसद उपयुक्त स्थान नहीं है। नवनीत कौर राणा सोमवार को 17वीं लोकसभा सांसदों के शपथग्रहण के दौरान जय श्रीराम के नारों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थीं। उन्होंने कहा कि इसके लिए मंदिर है। उन्होंने कहा कि सभी भगवान बराबर हैं लेकिन किसी को निशाना बनाए जाने के लिए भगवान का नाम लिया जाना गलत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से सदन में निष्पक्ष होने और देश के व्यापक हित से जुड़े विषयों पर ध्यान देने का आग्रह किया। संसद परिसर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘जब हम संसद आते हैं तो हमें पक्ष और विपक्ष भूल जाना चाहिए। हमें निष्पक्ष भावना के साथ मुद्दों के बारे में सोचना चाहिए और देश के व्यापक हित में काम करना चाहिए।
अमेठी लोकसभा सीट से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर पहली बार लोकसभा सांसद के रूप में पहुंचीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सोमवार को जब 17वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली तो उनकी पार्टी के सदस्यों ने काफी देर तक मेजें थपथपाकर उनका अभिनंदन किया। जैसे ही स्मृति का नाम शपथ ग्रहण के लिए बोला गया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, अन्य केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों समेत सत्तारूढ़ भाजपा सदस्यों को देर तक मेजें थपथपाते देखा गया। स्मृति ने हिंदी में शपथ ग्रहण किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने भी संसद सदस्य के रूप में शपथ ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने संस्कृत भाषा में और सदानंद गौड़ा ने कन्नड़ भाषा में शपथ ली। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाबी में संसद सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण किया।