Supreme Court News: दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगे के मामले में आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरा हैदर, शिफा उर रहमान, समेत सात आरोपियों की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार 5 जनवरी को अपना फैसला सुनाएगा। न्यायधीश अरविंद कुमार और एन वी अंजारिया की पीठ यह फैसला सुनाएगी।
दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और आरोपियों की ओर से वरिष्ठ वकी कपिल सिबल, अभिषेक सिंहवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 10 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दिल्ली दंगों में मारे गए थे 53 लोग
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य लोगों पर यूएपीए (UAPA) और आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि उन पर दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के बीच भड़की हिंसा में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हुए।
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दिल्ली पुलिस ने दायर किया था हलफनामा
पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में, दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए दावा किया था कि दंगे भारत को अस्थिर करने और इसे विश्व स्तर पर बदनाम करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थे। पुलिस ने कहा कि उन्होंने गवाहों के बयान, दस्तावेज और तकनीकी सबूत इकट्ठा किए हैं जो आरोपियों को सांप्रदायिक आधार पर रची गई एक गहरी साजिश से जोड़ते हैं।
लगभग 900 गवाहों की मौजूदगी के कारण मुकदमे में सालों लगने के तर्क को खारिज करते हुए, पुलिस ने इसे जमानत हासिल करने के लिए गढ़ा गया एक छलावा बताया और कहा कि केवल लगभग 100 से 150 गवाह ही महत्वपूर्ण हैं और अगर आरोपी सहयोग करते हैं तो मुकदमा तेजी से आगे बढ़ सकता है। यूएपीए का हवाला देते हुए हलफनामे में कहा गया कि गंभीर आतंकवाद से जुड़े अपराधों में जमानत नहीं, जेल का नियम है और यह तर्क दिया गया कि आरोपों की गंभीरता और प्रथम दृष्टया मामले के आधार पर केवल देरी के आधार पर रिहाई संभव नहीं है।
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