दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें मांग की गई थी कि बांग्लादेश को सभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित किया जाए। याचिका में दावा किया गया था कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया शामिल ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह का कोई निर्देश देना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश नीति से जुड़े सभी फैसले सरकार और विदेश मंत्रालय के दायरे में आते हैं न कि अदालत के। बेंच ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया के दायरे से बाहर हैं।

याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने यहां तक कहा कि गैर-जिम्मेदार याचिका दाखिल की गईं है और याचिकाकर्ता को यह सोचना चाहिए कि वो जुर्माने की राशि कैसे चुकाएगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था के कुछ पुराने फैसलों का हवाला दिया गया, जिस पर अदालत और भी नाराज हो गई। कोर्ट ने सीधा सवाल किया कि क्या भारत की न्याय व्यवस्था कभी पाकिस्तान की अदालतों को मान्यता देती है। इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका को पूरी तरह से गैर-जिम्मेदार और निराधार बताया।

आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की इच्छा जताई, लेकिन अदालत ने इसकी अनुमति नहीं दी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की याचिकाओं से अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

जानकारी के लिए बता दें कि 7 फरवरी से टी20 विश्व कप का आयोजन होने वाला है। इस टूर्नामेंट में बांग्लादेश का पहला मुकाबला वेस्टइंडीज के साथ होगा। यह मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला जाना है।