इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह वक्फ न्यायाधिकरण में खाली पदों (Waqf Tribunal Vacancy) को जल्द से जल्द भरे। कोर्ट ने कहा कि इन रिक्तियों की वजह से मामलों की ठीक से सुनवाई नहीं हो पा रही है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आदेश जस्टिस शेखर बी. सरफ और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ ने फैसल खान की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिका में की गई मांगों पर कोई फैसला नहीं दिया। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले ही सिंगल जज द्वारा अपनी शिकायतों के खिलाफ अपील करने की छूट दी जा चुकी है, इसलिए इस याचिका पर अलग से विचार नहीं किया जा सकता।

यह मामला मुतवल्ली (वक्फ संपत्ति के प्रबंधक) की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद से जुड़ा था। याचिकाकर्ता फैसल खान ने पहले संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने मुतवल्ली के रूप में उनकी नियुक्ति रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। इस याचिका पर सुनवाई करते समय सिंगल जज ने जुलाई 2025 में यह नोट किया कि याचिकाकर्ता ने पहले वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 83 के तहत वक्फ न्यायाधिकरण में अपनी शिकायत रखी थी। लेकिन उस समय वक्फ न्यायाधिकरण काम नहीं कर रहा था, इसलिए मजबूरी में याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।

दूसरी ओर, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 83 में किए गए संशोधन का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि न्यायाधिकरण के अभाव में या यदि न्यायाधिकरण कार्य नहीं कर रहा है तो पीड़ित व्यक्ति सीधे हाई कोर्ट में अपील कर सकता है। परिणामस्वरूप, सिंगल जज ने अनुच्छेद 227 के तहत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार, यदि आवश्यक हो, तो अपील करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी।

इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने अपील करने के बजाय डिवीजन बेंच में एक और रिट याचिका दायर कर दी। इसे देखते हुए डिवीजन बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि वह एकल न्यायाधीश के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।

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अदालत ने याचिका के मूल मुद्दों (गुण-दोष) पर कोई फैसला नहीं दिया, लेकिन यह जरूर कहा कि उत्तर प्रदेश में वक्फ न्यायाधिकरण का एक पद खाली है, जिसकी वजह से वहां कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो पा रही है।

इसी को ध्यान में रखते हुए पीठ ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह इस मामले पर ध्यान दे और कानून के अनुसार वक्फ न्यायाधिकरण में जल्द नियुक्ति करे। आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय के वरिष्ठ रजिस्ट्रार को राज्य सरकार को इस आदेश की जानकारी देने का निर्देश दिया गया। इन्हीं निर्देशों के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

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