Murshidabad Babri Masjid Case: कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास समारोह के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। एक्टिंग चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य पर छोड़ दी।

हाई कोर्ट निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के 6 दिसंबर को होने वाले कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राज्य सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल तैनात किए गए हैं, जबकि केंद्र ने कहा कि केंद्रीय बलों की 19 कंपनियां वहां तैनात हैं।

हुमायूं कबीर ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे याचिकाकर्ताओं के लिए “उचित जवाब” बताया। उन्होंने न्यूज एंजेसी ANI से कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि मैं आधारशिला रखूंगा। मैं हाईकोर्ट के फैसले से बेहद खुश हूं। मैं हाईकोर्ट के जज को धन्यवाद देता हूं। यह मेरा संवैधानिक अधिकार है। जिन लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, उन्हें करारा जवाब मिला है।”

कबीर ने यह घोषणा करके विवाद खड़ा कर दिया था कि वह मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे और इसमें विभिन्न मुस्लिम नेता शामिल होंगे। उन्होंने कहा, “हम 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखेंगे। इसे पूरा होने में तीन साल लगेंगे। इस कार्यक्रम में विभिन्न मुस्लिम नेता शामिल होंगे।”

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इससे पहले गुरुवार को हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपना हमला तेज करते हुए घोषणा की कि 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद वह सत्ता में नहीं रहेंगी। निलंबित विधायक ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए मीडिया से कहा, “मुख्यमंत्री को पूर्व मुख्यमंत्री होना चाहिए। 2026 में मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नहीं बनेगा, शपथ नहीं लेगा और उसे पूर्व मुख्यमंत्री करार दिया जाएगा।”

कबीर की यह टिप्पणी टीएमसी द्वारा इस विवाद के बाद उन्हें निलंबित किए जाने के कुछ घंटों बाद आई है। उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की घोषणा भी कर सकते हैं। हुमायूं कबीर बंगाल कैडर के पुलिस पदाधिकारी थे।

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