जयपुर की एक अदालत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है। यह मामला राहुल गांधी के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई जाति आधारित टिप्पणी का है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया।
शिकायतकर्ता ने याचिका में क्या कहा?
अदालत में दायर याचिका में शिकायतकर्ता ने कहा था कि राहुल गांधी ने नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद भी जाति से जुड़े बयान दिए थे और ऐसे बयान जनता को भड़काने वाले थे।
याचिकाकर्ता का कहना था कि राहुल गांधी के इस तरह के बयान देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाले थे।
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पीएम मोदी जन्म से ओबीसी नहीं- राहुल
याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में राहुल गांधी के द्वारा 2024 में निकाली गई भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान की गई टिप्पणियों का जिक्र किया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जन्म से ओबीसी नहीं हैं बल्कि वह गुजरात के तेली समुदाय से संबंध रखते हैं। तेली समुदाय को 2000 में ओबीसी वर्ग में शामिल किया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि राहुल गांधी ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म सामान्य जाति में हुआ था और बाद में उनकी जाति को ओबीसी वर्ग में शामिल किया गया।
एडवोकेट विजय कलंदर ने राहुल गांधी की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी और दावा किया था कि राहुल गांधी ने इन बयानों को देते वक्त खुद की जाति की पहचान को छुपा लिया था।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीलम करवा ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान और रिकॉर्ड में रखे गए सबूत से याचिका के पक्ष में कोई आधार नहीं बनता। इसके बाद जज ने याचिका को खारिज कर दिया।
राहुल गांधी के दावे को बीजेपी ने किया था खारिज
राहुल गांधी ओडिशा में भी एक जनसभा में कह चुके हैं कि पीएम मोदी को गुजरात की बीजेपी सरकार ने ओबीसी बनाया था। बीजेपी ने उनके इस बयान को खारिज कर दिया था। राहुल गांधी के बयान के जवाब में बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने 27 अक्टूबर, 1999 को भारत सरकार के गैजेट नोटिफिकेशन की एक कॉपी जारी की थी।
इस नोटिफिकेशन में कहा गया था कि ‘मोध घांची’ समुदाय को ‘घांची (मुस्लिम)’, ‘तेली’ और ‘माली’ समुदायों के साथ ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया था। उस समय केशूभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री थे, जबकि नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर, 2001 को पहली बार मुख्यमंत्री बने थे।
बीजेपी के भीतर ही इस मामले में अलग-अलग बयान सामने आ चुके हैं। गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद नरहरि अमीन ने कहा है कि गुजरात में कांग्रेस सरकार के दौरान 25 जुलाई, 1994 को ‘मोध’ और ‘घांची’ समुदायों को ओबीसी श्रेणी में जोड़ा गया था। नरहरि अमीन कहा था कि उस समय नरेंद्र मोदी किसी सरकारी पद पर नहीं थे।
राहुल को सुनाई थी सजा
राहुल गांधी को इससे पहले इसी तरह के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। 2023 में, सूरत की एक अदालत ने उन्हें मोदी उपनाम से जुड़ी टिप्पणियों के लिए दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले और सजा पर रोक लगा दी थी।
