आवारा कुत्तों के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि उन्होंने न्यायाधीशों के खिलाफ अपनी टिप्पणियों के माध्यम से “अदालत की अवमानना” की है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह अपनी “उदारता” दिखाते हुए इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारी की पीठ के सामने सुनवाई के पांचवें दिन था। सुनवाई शुरू होते ही वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पिछली सुनवाई के दौरान पीठ द्वारा की गई कुछ मौखिक टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की द्वारा की गई टिप्पणियां गलत तरीके से समझी जाती हैं।

जस्टिस मेहता ने कहा कि अदालत की टिप्पणियां कुत्ता-प्रेमियों की ओर से दिए गए अवास्तविक तर्कों के जवाब में की गई थीं। इस पर भूषण ने कहा कि कभी-कभी अदालत की टिप्पणियों के गंभीर नतीजे होते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर पीठ यह कहे कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और इसकी खबर छप जाए, तो उसका असर पड़ सकता है। इस पर न्यायमूर्ति मेहता ने साफ किया कि पीठ की टिप्पणियां व्यंग्य में नहीं थीं। उन्होंने कहा, “नहीं, ये बिल्कुल भी व्यंग्यात्मक नहीं थीं। हम गंभीर थे। हमें अभी नहीं पता कि आगे क्या करेंगे, लेकिन हम इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं।”

इस मौके पर मेनका गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने बीच में दखल देते हुए कहा, “बार के सदस्य के तौर पर मैं भी इस पर कुछ कहना चाहता हूं। कार्यवाही का टेलीविजन पर प्रसारण होता है। बार और बेंच दोनों का यह कर्तव्य है कि वे सावधानी बरतें।”

जस्टिस मेहता ने जवाब दिया, “हमें इसकी जानकारी है। इसे ध्यान में रखते हुए हम कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।” कुछ देर बाद, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने रामचंद्रन को संबोधित करते हुए कहा, “कुछ देर पहले आप हमें बता रहे थे कि अदालत को सतर्क रहना चाहिए, क्या आपने पता लगाया कि आपके मुवक्किल किस तरह के बयान दे रहे हैं?”

रामचंद्रन ने कहा, “बिल्कुल। अगर मैं अजमल कसाब के लिए पेश हो सकता हूं, तो मैं उनके लिए भी पेश हो सकता हूं।” बता दें, मुंबई आतंकी हमले के मामले में अजमल कसाब का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी रामचंद्रन थे।

जस्टिस नाथ ने रामचंद्रन से कहा, “आपकी मुवक्किल ने अवमानना ​​की है। हमने कोई कार्रवाई नहीं की है, यही हमारी उदारता है। आप देखिए वह क्या कहती हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है!” वरिष्ठ वकील ने कहा, “सार्वजनिक टिप्पणियों के मामले में वकील और न्यायाधीश अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाएंगे। मुझे आवेदनों पर बोलने दीजिए।

रामचंद्रन ने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control (ABC)) नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन इस समस्या से निपटने की किसी भी व्यापक रणनीति का अभिन्न अंग है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रेबीज उन्मूलन कार्य योजना (एनएपीआरई) नीति ने पहले ही रेबीज उन्मूलन में आने वाली नौ प्रमुख बाधाओं की पहचान कर ली है, सभी हितधारकों की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है और राज्यों को अपनी-अपनी कार्य योजनाएं बनाने का निर्देश दिया है। हालांकि, 30 से ज्यादा राज्य ऐसा करने में विफल रहे हैं। उनके अनुसार, समाधान स्थायी आश्रय स्थल बनाने के बजाय मौजूदा ढांचे के समयबद्ध कार्यान्वयन में निहित है।

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इसके बाद जस्टिस मेहता ने उनसे पूछा, “चूंकि आपके मुवक्किल मंत्री रह चुकी हैं और पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं…तो हमें यह बताएं कि आपके आवेदन में बजटीय आवंटन का जिक्र क्यों नहीं है…इनमें आपके मुवक्किल का क्या योगदान रहा है…?”

रामचंद्रन ने उत्तर दिया कि वह प्रश्न का मौखिक उत्तर नहीं दे सकते। इसके बाद पीठ ने कुत्ते प्रेमियों और कुत्ते के हमलों के पीड़ितों के पक्षों के विभिन्न वकीलों की दलीलें सुनीं। अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी। वहीं, सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में कपिल सिब्बल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू के बीच तीखी बहस हो गई।