दिल्ली-एनसीआर में हरियाली कम होने और खतरनाक स्तर के प्रदूषण को लेकर चिंता है। इसी बीच दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने दक्षिण दिल्ली में सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (CAPFIMS) अस्पताल जाने वाली सड़क को चौड़ा करने के लिए 473 पेड़ काटने की अनुमति मांगी है। इसके लिए डीडीए ने सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त देने का अनुरोध किया है।

गौरतलब है कि पिछले साल डीडीए पर बिना अदालत की अनुमति के 642 पेड़ काटने का आरोप लगा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को अवमानना का दोषी नहीं ठहराया था, यह कहते हुए कि यह काम जनहित से जुड़ी परियोजना का हिस्सा था। इस सड़क परियोजना के लिए डीडीए ने 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल और 2,519 पौधों को दूसरी जगह लगाने की अनुमति भी कोर्ट से मांगी थी।

डीडीए ने अदालत से कहा है कि अस्पताल तक एम्बुलेंस और मरीजों की आवाजाही आसान बनाने के लिए सड़क को चौड़ा करना जरूरी है। इसी वजह से 473 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई है। डीडीए के मुताबिक, सीएपीएफआईएम एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना है, जहां घायल अर्धसैनिक बलों के जवानों का इलाज और देखभाल की जाएगी। यह अस्पताल एम्स के तहत काम करेगा।

प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि अस्पताल पूरी तरह तैयार है, लेकिन सड़क चौड़ी होने के बाद ही इसे शुरू किया जा सकता है। नियमों के अनुसार इस सड़क की चौड़ाई 24 मीटर होनी चाहिए। यह कहा गया है कि वहां पहले से ही एक सड़क मौजूद थी, जो उन स्थानों की जरूरतों को पहले भी पूरा करती थी और अब भी करती है।

इस अस्पताल में गंभीर रूप से घायल अर्धसैनिक बलों के जवानों और आपातकालीन मरीजों का समय पर और आसानी से इलाज हो सके, इसके लिए सड़क का चौड़ीकरण जरूरी बताया गया है। मुख्य छतरपुर रोड से अस्पताल तक जाने वाली 2.72 किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा करने की योजना है। इससे सार्क विश्वविद्यालय, सीबीआई के आवासीय क्वार्टर और सीआईएसएफ के आवासीय परिसर जैसे अन्य संस्थानों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

डीडीए का कहना है कि सड़क की मौजूदा चौड़ाई लगभग 7.5 मीटर है, जो आपात स्थिति में एम्बुलेंस चलाने और अस्पताल शुरू होने के बाद बढ़ने वाले ट्रैफिक के लिए काफी नहीं है। इसके बदले में डीडीए ने द्वारका के धूलसिरास इलाके में 3.68 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पर नए पेड़ लगाने के लिए जगह चिन्हित की है।

मई 2025 के उस आदेश का हवाला देते हुए, जिसमें अदालत ने अवमानना की कार्यवाही समाप्त की थी, डीडीए ने कहा कि वह अदालत से बेहद सम्मानपूर्वक सड़क के चौड़ीकरण और निर्माण की अनुमति मांग रहा है। डीडीए के अनुसार, यह काम न केवल जनहित में है, बल्कि इलाके में भविष्य की विकास परियोजनाओं को भी आसान बनाएगा।

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पिछले साल अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि सीएपीएफआईएमएस की स्थापना से जुड़ा बड़ा जनहित ही ऐसा कारण रहा, जिसकी वजह से प्रशासनिक लापरवाही और नियमों व अदालत के आदेशों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने यह भी कहा था कि संबंधित अधिकारियों की किस्मत अच्छी रही, वरना अदालत को कहीं ज्यादा सख्त कदम उठाने पड़ते।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि आगे से वनरोपण, सड़क निर्माण, पेड़ कटाई या पर्यावरण पर असर डालने वाले किसी भी काम से जुड़ी हर अधिसूचना या आदेश में यह साफ तौर पर बताया जाए कि इस मामले से जुड़ी कोई कार्यवाही अदालत में लंबित है या नहीं। यह निर्देश इसलिए दिया गया ताकि भविष्य में कोई यह न कह सके कि उसे इसकी जानकारी नहीं थी।

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