Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद में एक राशन दुकान के डीलर का लाइसेंस रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। डीलर पर आरोप था कि उसने 697 पंजीकृत राशन कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए सिर्फ तीन आधार कार्ड नंबरों का इस्तेमाल किया।

जस्टिस अरुण कुमार ने डीलर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपना लाइसेंस रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि डीलर यह ठीक से नहीं समझा सका कि तीन आधार कार्ड से 697 लोगों का राशन कैसे निकाला गया। अदालत के रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत भी नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि डीलर द्वारा दिए गए 162 हलफनामे वास्तव में उन 697 कार्डधारकों के हैं, जिनका राशन हेराफेरी करके निकाला गया था। इसलिए अदालत ने साफ किया कि लाइसेंस रद्द करने का फैसला सही है और इसमें कोई गलती नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला अगस्त 2018 का है। उस समय उत्तर प्रदेश के खाद्य आयुक्त ने 43 जिलों में राशन वितरण में गड़बड़ियों का खुलासा किया था। जांच में पता चला कि एक ही आधार नंबर का इस्तेमाल कर कई राशन कार्डधारकों के नाम पर राशन निकाला गया। इसके बाद मामले की एकतरफा जांच की गई और डीलर के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

आरोपों के आधार पर डीलर की उचित मूल्य दुकान (राशन दुकान) का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। आरोप था कि तीन आधार कार्ड नंबरों का इस्तेमाल कर 697 कार्डधारकों के हिस्से का राशन निकालकर कालाबाजारी की गई। डीलर को इन आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया। डीलर ने जवाब में कहा कि यह सब ई-पीओएस मशीन में आई तकनीकी खराबी की वजह से हुआ और उसने किसी भी तरह की हेराफेरी से इनकार किया।

ई-पीओएस मशीन क्या है?

ई-पीओएस (इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन एक डिजिटल मशीन होती है, जिसका इस्तेमाल राशन या सामान की बिक्री दर्ज करने और लाभार्थियों की जानकारी रखने के लिए किया जाता है। इसमें स्कैनर, प्रिंटर और कार्ड रीडर जैसे उपकरण लगे होते हैं और यह सॉफ्टवेयर के जरिए काम करती है।

इस मामले में 2019 में डीलर की उचित मूल्य दुकान (राशन दुकान) की डीलरशिप रद्द कर दी गई। डीलर ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन वह भी खारिज कर दी गई। इसके बाद डीलर ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

हाई कोर्ट का फैसला?

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह ठीक से नहीं समझा सका कि 697 राशन कार्डधारकों का राशन सिर्फ तीन आधार कार्डों से कैसे निकाला गया। अदालत ने यह भी पाया कि कोई ऐसा सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि डीलर द्वारा दिए गए 162 हलफनामे उन्हीं 697 कार्डधारकों के हैं, जिनका राशन गलत तरीके से निकाला गया था।

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अदालत ने साफ कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी मौजूद नहीं है जो यह दिखाए कि ये हलफनामे उन्हीं लोगों के हैं जिनके राशन में हेराफेरी हुई। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप तभी माने जा सकते हैं, जब उनके खिलाफ स्पष्ट और ठोस आरोप या सबूत पेश किए जाएं। केवल आरोप लगाना काफी नहीं है।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि विभागीय अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए झूठी एफआईआर दर्ज कराई और डीलर का लाइसेंस रद्द किया। अदालत ने कहा कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस आधार नहीं है। इन सभी कारणों से हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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