वेंकट कृष्ण बी। लगभग एक महीना हो गया है, लेकिन तमिलनाडु के तेज गेंदबाज गुरजपनीत सिंह को अभी भी याद है कि विराट कोहली ने उन्हें किस तरह से घूरा था। वह अपने मन में कह रहे थे कि ‘उनकी तरफ दोबारा मत देखना’। दिग्गज तेज गेंदबाज आशीष नेहरा जैसे एक्शन वाले बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने रविवार (13 अक्टूबर) को तमिनाडु के लिए रणजी डेब्यू मैच में सौराष्ट्र के खिलाफ कहर बरपाया। उन्होंने दिग्गज क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा को शून्य पर आउट किया।
एमए चिदंबरम स्टेडियम में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय टीम के कैंप के दौरान गुरजपनीत नेट बॉलर थे। उन्होंने विराट कोहली को आउट किया। उन्होंने जश्न नहीं मनाया, लेकिन कोहली ने उन्हें घूरकर देखा, जिसे बाएं हाथ का यह तेज गेंदबाज कभी नहीं भूलेगा। कोहली ने इसके बाद स्ट्रेट ड्राइव से जवाब दिया। हर डिलीवरी के साथ, तमिलनाडु के तेज गेंदबाज को कोहली का गुस्सा पिघलता हुआ महसूस हुआ। सत्र के अंत में भारत के पूर्व कप्तान ने युवा तेज गेंदबाज को कुछ अच्छी सलाह दी।
विराट कोहली से मिली अहम सलाह
गुरजपनीत ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मैंने उन्हें बोल्ड मारने के बाद उनकी तरफ देखा और फिर से देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। वह बहुत- बहुत गुस्से में था। लेकिन मुझे एहसास हुआ कि वह किसी भी चीज से ज्यादा खुद से नाराज थे। स्ट्रेट ड्राइव के बाद उन्होंने फिर से मेरी तरफ देखा और मुस्कुराए।” इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि तेज गेंदबाजों के लिए कोहली ने अहम सलाह भी दी। गुरजपनीत ने बताया, “उन्होंने मुझसे कहा जब कोई मूवमेंट न हो, तो एंगल बदलें और अराउंड द विकेट गेंदबाजी करने की कोशिश करें। क्योंकि उस एंगल से, अगर आप थोड़ी बहुत मूवमेंट भी हासिल कर लेते हैं, तो यह ज्यादातर बल्लेबाजों को परेशान करेगा।”
सौराष्ट्र के शीर्ष क्रम की कमर तोड़ी
एसएनआर कॉलेज की पिच से धूप के कारण रविवार को गेंदबाजों के लिए कोई मदद नहीं थी। नई गेंद से गेंदबाजी करते गुरजपनीत ने अराउंड द विकेट गेंदबाजी। आशीष नेहरा के समान क्विक आर्म एक्शन वाले इस तेज गेंदबाज ने रणजी ट्रॉफी मुकाबले में सौराष्ट्र के शीर्ष क्रम की कमर तोड़कर रख दी। तमिलनाडु के 164 रनों की बढ़त लेने के साथ गुरजपनीत के 9 में 7 रन देकर 4 विकेट लिए। इस स्पेल में 5 मेडन किए। सौराष्ट्र का दूसरी पारी में स्कोर 5 विकेट पर 35 रन हो गया, जब भारी बारिश के कारण तीसरे दिन का खेल जल्दी समाप्त हो गया।
आईपीएल स्काउट्स के बीच चर्चा
रणजी ट्रॉफी में अपने डेब्यू मैच की पहली पारी में विकेट से महरूम रहने के बाद दूसरी पारी में गुरजपनीत ने दिखाया कि आईपीएल स्काउट्स के बीच भी उनके बारे में काफी चर्चा है। 20 मिनट की बारिश के ब्रेक के बाद चौथे ओवर में गुरजपनीत ने सबसे पहले चिराग जानी को अपना पहला विकेट लिया। लेकिन चेतेश्वर पुजारा के विकेट ने सौराष्ट्र की कमर तोड़ दी।
पुजारा को कैसे किया आउट
अराउंड द विकेट से गेंदबाजी करते हुए गुरजपनीत ने ओवर की शुरुआत एक तेज बाउंसर से की, जिससे पुजारा चकमा खा गए। इसके बाद उन्होंने गुड लेंथ की गेंदें फेंकी और फिर एक बाउंसर फेंकी, जो अपने पंजे पर खड़े पुजारा के दस्ताने तक पहुंची। नंबर 3 के शानदार बल्लेबाज क्रीज में फंस गए। आखिरी गेंद पर गुरजपनीत ने कोहली के सुझाव का इस्तेमाल किया। उन्होंने इस गेंद को कोण से अंदर आने दिया और नई गेंद ने सही दिशा पकड़ी और पुजारा शून्य पर एलबीडब्लू आउट हो गए।
बालाजी ने क्या कहा था
गुरजपनीत ने कहा, “जब आप उनके जैसे दिग्गज बल्लेबाज को गेंदबाजी करते हैं, तो आपको शुरू से ही सटीक गेंदबाजी करनी होती है। इसलिए हमारी योजना उन्हें बैकफुट पर धकेलने और फिर एक अच्छी फ्रंटफुट लाइन की गेंद करने पर थी, जिससे वह असहज हो जाएं। पहली पारी में विकेट नहीं मिलने के बाद, बाला भाई (एल बालाजी) ने मुझे विकेट की तलाश में रहने के लिए कहा। इस बात की प्रबल संभावना थी कि मैं अपनी योजना से भटक जाऊं। पिच से ज्यादा मदद नहीं मिलने के कारण, स्टंप के आसपास गेंदबाजी करना सबसे अच्छा विकल्प था। यह कारगर रहा क्योंकि हमने सुबह के सत्र में (जयदेव) उनादकट को भी ऐसा ही करते देखा।”
पंजाब छोड़ चेन्नई क्यों गए गुरजपनीत
गुरजपनीत के लिए ट्रैक बदलना कोई नई बात नहीं है। अंबाला में जन्मे और पले-बढ़े पंजाब की आयु-समूह टीमों में बार-बार जगह बनाने में विफल रहने के कारण उन्होंने अपने कोच की सलाह पर चेन्नई में अपना बेस शिफ्ट कर लिया। 17 साल की उम्र में उन्होंने अपना बैग पैक किया और गुरु नानक कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई करने के लिए चेन्नई चले गए, जहां खूब क्रिकेट होता है। यहां से शहर के क्रिकेट इको-सिस्टम नियंत्रित होता है। उन्होंने कहा, “क्रिकेट ही मैं जानता था और पंजाब में आपको वैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। यहां आपको पता है कि सिस्टम में कैसे आना है, लेकिन घर पर ऐसा नहीं है क्योंकि आप चयन ट्रायल, कैंप आदि के बारे में पूरी तरह से अधर में रहते हैं। इसलिए चेन्नई जाना कोई बड़ी बात नहीं थी।
