इस सप्ताह के अंत यानी 15 नवंबर से यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) में टी10 क्रिकेट लीग में हिस्सा लेने के लिए कई शीर्ष क्रिकेटर दुनिया के कोने-कोने से अबुधाबी पहुंच रहे हैं। हालांकि, इनमें से किसी को भी उतनी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा होगा, जितना भारत के शंकर सज्जन ने किया है, भले ही उनका घर यूएई से बहुत दूर नहीं हो। 19 साल के यह लेग स्पिनर बेंगलुरु से यूएई पहुंचा है। वे यहां शुक्रवार से शुरू होने वाले टूर्नामेंट से पहले दिल्ली बुल्स के लिए नेट गेंदबाज के तौर पर काम करेंगे।
सज्जन की यह उपलब्धि इसलिए और महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके शरीर का ऊपरी हिस्सा सामान्य नहीं है। उनके दोनों हाथ पूरी तरह सीधे नहीं हो सकते हैं। हालांकि, सज्जन ने इस विकलांगता को अपनी ताकत बनाया और आज वे कर्नाटक क्रिकेट का जाना-पहचाना चेहरा हैं। शंकर की भारत से बाहर यह पहली यात्रा है। फ्रैंचाइजी ने जब उन्हें आमंत्रित किया तब तक उनके पास पासपोर्ट भी नहीं था। वे टूटी-फूटी यानी कामचलाऊ अंग्रेजी तो बोल लेते हैं, लेकिन हिंदी में उनका हाथ तंग है। हालांकि, उनकी इस यात्रा में हिंदी उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। हालांकि, उनका दावा है कि वे समय रहते इसे सीख लेंगे।
सज्जन ने बताया, ‘मुझे इस तरह का मौका मिलने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन अचानक ऐसा हुआ और मेरे पास पासपोर्ट नहीं था। जब मुझे सेलेक्शन लेटर मिला तो उसके महज 2 दिन के अंदर मैंने पासपोर्ट हासिल कर लिया। एक दिन वीजा लेने में लग गया और मैं तुरंत ही दुबई आने के लिए तैयार हो गया।’ सज्जन के मुताबिक, ‘मुझे मेरे शहर के कोच का भरपूर समर्थन मिला। मैंने उन्हें अपना सेलेक्शन लेटर दिखाया। उन्होंने हमेशा मेरे क्रिकेट करियर का समर्थन किया है। उन्होंने कुछ लोगों को फोन किए और बहुत तेजी से प्रक्रिया शुरू की। यह देश के बाहर मेरा पहला दौरा है। मैं बहुत उत्साहित था। मैं सुबह 3:30 बजे ही उठ गया था, जबकि फ्लाइट सुबह 7 बजे की थी। मैं 2 घंटे पहले ही एयरपोर्ट पहुंच गया था।’
सज्जन ने बताया, ‘मुझे मेरा पासपोर्ट और टिकट मिल गया। उसके बाद, मुझे नहीं पता था कि कहां जाना है, फ्लाइट कहां है। मैं कन्फ्यूज्ड था। मैंने किसी से पूछा, ‘सर, फ्लाइट का गेट कहां है। मैं गेट पर पहुंचने में कामयाब रहा और दुबई पहुंच गया।’ सज्जन की यह रोमांचकारी यात्रा शायद बहुत ही चुनौतीपूर्ण थी। हालांकि, इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्हें चुनौतियों का सामना करने की आदत है। दरअसल, जन्मजात क्रोमोसोम (गुणसूत्र) असंतुलन होने के कारण सज्जन अधूरे ऊपरी अंगों के साथ पैदा हुए थे। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद वे गृह प्रदेश कर्नाटक के एक प्रसिद्ध क्रिकेटर बन चुके हैं।
दिल्ली बुल्स ने भी उन्हें यह मौका इसलिए दिया है, क्योंकि वे अपनी काबिलियत के बल पर जाने जाते हैं। पिछले साल बेंगलुरु में अफगानिस्तान ने अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। उस मैच से पहले भी सज्जन ने अफगानिस्तान के बल्लेबाजों के लिए गेंदबाजी की थी। वे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की फ्रैंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए भी ऐसी ही भूमिका निभाते हैं। सज्जन कहते हैं कि वे नहीं चाहते हैं कि कोई उन्हें एक दिव्यांग के तौर पर पहचाने जाएं। सज्जन को यह भी उम्मीद है कि उन्हें देखकर लोग प्रेरणा लेंगे। सज्जन ने अपने-अपने छोटे-छोटे हाथों की ओर इशारा करते हुए बताया, ‘बचपन में जब मुझे डॉक्टर के पास ले जाया गया, तब उन्होंने कहा कि मैं जीवन में कभी भी सीधे हाथ नहीं रख पाऊंगा, क्योंकि इसमें कोई भी बड़ी हड्डियां नहीं हैं।’
दोनों हाथ खराब, फिर भी इस भारतीय गेंदबाज की फिरकी में उलझे अफगानी बल्लेबाज



