ताज़ा खबर
 

IND vs AFG: दोनों हाथ खराब, फिर भी इस भारतीय गेंदबाज की फिरकी में उलझे अफगानी बल्‍लेबाज

शुरुआत में तो अफगानी बल्लेबाज उन्हें हल्के में लेते रहे लेकिन जैसे ही उनके विकेट धड़ाधड़ चटकने शुरू हुए। उन्हें पता चल गया कि उनसे इस गेंदबाज की प्रतिभा को आंकने में भूल हुई है। अफगानिस्तान के बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा दिक्कत शंकर सज्जन की गुगली को खेलने में हुई।

अफगान बल्लेबाजाेें के साथ बेंगलुरु में नेट प्रैक्टिस के दौरान भारतीय स्पिन गेंदबाज शंकर सज्जन। फोटो- पीटीआई

तीन साल पहले पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘स्पिन स्टार्स हंट’ के लिए गए थे। इस कार्यक्रम का मकसद स्पिन गेंदबाजी करने वाले भविष्य के गेंदबाजों की खोज करना था। इस दौरान लगभग दो हजार स्पिनरों को देखने के बाद कुंबले ने सिर्फ 110 खिलाड़ियों को चुना था। इस दौरान 17 साल के एक लड़के को जिसे सेलेक्टर्स ने फेल कर दिया था। लेकिन कुंबले ने उसे सेलेक्टर्स से खास अनुरोध करके सेलेक्ट करवाया था। ये टेस्ट बेंगलुरु के एनआरए मैदान पर लिया गया था। उस लड़के का नाम शंकर सज्जन था। 18 वर्षीय सज्जन दोनों हाथों से दिव्यांग हैं। लेकिन आज शंकर सज्जन की धारदार गेंदबाजी को कोई भी बल्लेबाज हल्के में नहीं ले सकता है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच 14 जून से शुरू होने जा रहे टेस्ट मैच की तैयारी के लिए दोनों देशों की टीमें जमकर पसीना बहा रही हैं। मंगलवार (12 जून) को शंकर स्वामी को अफगानिस्तान के बल्लेबाजों को नेट प्रैक्टिस के लिए गेंद फेंकने भेजा गया था। शुरुआत में तो अफगानी बल्लेबाज उन्हें हल्के में लेते रहे लेकिन जैसे ही उनके विकेट धड़ाधड़ चटकने शुरू हुए। उन्हें पता चल गया कि उनसे इस गेंदबाज की प्रतिभा को आंकने में भूल हुई है।

अफगानिस्तान के बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा दिक्कत शंकर सज्जन की गुगली को खेलने में हुई। वह समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर कैसे दोनों हाथों से दिव्यांग कोई शख्स इतनी सधी हुई लाइन और लेंथ के साथ गेंद फेंक सकता है। स्वभाव से बेहद विनम्र 18 साल के सज्जन ने मीडिया से बातचीत में कहा,”कुंबले और राशिद खान मेरे हीरो हैं। मैं उन दोनों को ही बहुत प्यार करता हूं।”

अफगान बल्लेबाज हश्मतउल्ला शाहिदी के साथ बेंगलुरु में नेट प्रैक्टिस के दौरान भारतीय स्पिन गेंदबाज शंकर सज्जन। फोटो- पीटीआई

शंकर सज्जन फिलहाल बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में नियमित प्रैक्टिस करते हैं। इसीलिए कर्नाटक राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारी ने उन्हें अफगानी खिलाड़ियों को गेंद फेंकने के लिए उन्हें बुलाया था। शंकर ने बचपन मेंं ही अपनी मां को खो दिया था। उनकी जिंदगी इतनी भी आसान नहीं रही है। छह साल पहले जब वह क्रिकेट सीखने के लिए बीजापुर के साहू क्रिकेट क्लब में गए तो कोच ने उनसे कहा कि तुम सिर्फ एक शर्त पर ही क्रिकेट खेल सकते हो, जब तुम गेंदबाज बनने के लिए तैयार हो।

कड़ी मेहनत के बूते शंकर सज्जन ने सभी टेस्ट पास कर लिए और आज वह बेहतरीन गेंदबाज बनने की राह पर चल पड़े हैं। शंकर ने मीडिया को बताया,” जब मैं प्रैक्टिस के बाद एरिना से बाहर निकला तो अफगानी क्रिकेटर मोहम्मद नबी मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि बड़े सपने देखो, तुम बहुत आगे जाओगे।” शंकर सज्जन कहते हैं,”मैं कुंबले सर का प्रशंसक हूं और यह मेरा सपना सच होने जैसा है। उन्होंने मुझसे कहा है कि वह मेरी पढ़ाई और ट्रेनिंग प्रायोजित करेंगे।” हालांकि अभी यह कहना तो जल्दबाजी होगी कि शंकर भविष्य में कैसा प्रदर्शन करते हैं। लेकिन इतना तो तय है कि एक खास गेंदबाज ने दूसरे खास गेंदबाज को खोज निकाला है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App