ओलंपिक की मिश्रित युगल स्पर्धा में हिस्सा नहीं ले पाने की कड़वाहट अब भी लिएंडर पेस के मन में है और इस अनुभवी भारतीय स्टार ने कहा कि भारत ने रियो में इस स्पर्धा के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम नहीं भेजी थी। खेलों से पहले मिश्रित युगल में अपने शानदार प्रदर्शन के संदर्भ में पेस ने कहा, ‘मैं स्पष्ट तौर पर कह सकता हूं कि इस ओलंपिक और पिछले ओलंपिक में हमने अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम नहीं उतारी। इस ओलंपिक में मिश्रित युगल में शानदार मौका था। एक व्यक्ति को 14 महीने में चार ग्रैंडस्लैम जीतने से ज्यादा क्या करना चाहिए। जीतने के लिए और टूर्नामेंट नहीं बचे हैं, मैं और टूर्नामेंट नहीं बना सकता। दुखद। लंबी कहानी को छोटा करता हूं, चलिए इन बच्चों को निखारें।’
रियो ओलंपिक में सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था और इस जोड़ी को सेमीफाइनल में हार के बाद कांस्य पदक के प्ले ऑफ मुकाबले में भी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। साकेत माइनेनी के साथ मिलकर डेविस कप के युगल मुकाबले में रफेल नडाल और मार्क लोपेज के खिलाफ शिकस्त के बाद पेस ने संवाददाताओं से यह बात कही। उन्होंने साथ ही कहा कि वह सर्किट में साकेत के साथ जोड़ी बनाना पसंद करेंगे।
पेस ने कहा, ‘मैं उसके (साकेत) साथ खेलना पसंद करूंगा। मेरे कई साझेदार रहे जो उससे कम प्रतिभावान थे। अगर मुझे साकेत छह महीने के लिए मिलता है और अगर वह कड़ी मेहनत करता है तो वह सिर्फ मेरे साथ ही नहीं बल्कि अन्य खिलाड़ियों के साथ भी ग्रैंडस्लैम खिताब जीत सकता है। वह ग्रैंडस्लैम विजेता बन सकता है।’ साकेत की तारीफ करते हुए पेस ने कहा कि साकेत में ग्रैंडस्लैम विजेता बनने की क्षमता है। उन्होंने कहा, ‘मैं काफी रोमांचित हूं क्योंकि साकेत और मैं पहली बार साथ खेले। मैं उसकी सर्विस और रिटर्न से प्रभावित हूं। मुझे लगता है कि वह हार्ड कोर्ट का नैसर्गिक खिलाड़ी है। 107 खिलाड़ियों के साथ खेलने के बाद मुझे पता है कि वह इतना बुरा नहीं है।’
दूसरी तरफ साकेत ने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान एकल मैचों पर है। उन्होंने कहा, ‘जब तक मेरा शरीर साथ देगा एकल मेरी प्राथमिकता है। मुझे उनकी पेशकश पसंद है। मैं कोर्ट के अंदर और बाहर अब भी काफी कुछ सीख रहा हूं। लंबा रास्ता तय करना है। इसलिए मैं एकल खेलना पसंद करूंगा और युगल के साथ इसे संतुलित करूंगा। मैं अपनी एकल रैंकिंग में सुधार की कोशिश करूंगा जिससे कि युगल भी खेल पाऊं।’

