महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत हो गयी है। पुणे जिले में बुधवार सुबह विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना तब हुई जब पवार का विमान पुणे के बारामती इलाके में उतर रहा था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान में सवार किसी भी व्यक्ति की जान नहीं बची है। NCP प्रमुख को स्थानीय निकाय चुनावों से पहले रैलियों को संबोधित करने के लिए बारामती की यात्रा करनी थी। आइए अजित पवार के राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार को पिछले 14 सालों में 6 बार उप मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देओली प्रवर से की और माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड से पूरी की। उनकी शिक्षा माध्यमिक स्तर तक ही रही। उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी पढ़ाई-लिखाई पर असर पड़ा।
अजित पवार का महाराष्ट्र की राजनीति में प्रवेश
अजित एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे। उनके पिता वी. शांताराम, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया। जनता और समर्थकों के बीच वह ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय रहे।
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अजित के चाचा शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति में पहले से ही एक स्थापित कांग्रेसी नेता थे। अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत 1982 में की, जब वह मात्र 23 वर्ष के थे। उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा। इसके बाद 1991 में वह पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और 16 सालों तक इस पद पर काबिज रहे। वह साल 1991 में बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए लेकिन अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी थी। इसके बाद उसी वर्ष वह महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए। अजित पवार 1995 में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव के लिए बारामती सीट से खड़े हुए और इसके बाद उन्होंने लगातार कई चुनाव जीते। 2024 में लगातार सात बार इस सीट से विधायक बने।
अजित पवार ये प्रमुख मंत्री पद संभाले-
- अजित पवार बारामती विधानसभा क्षेत्र से सात बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।
- उन्होंने पहली बार 1991 के उपचुनाव में जीत दर्ज की।
- इसके बाद उन्होंने लगातार पांच चुनावों 1995, 1999, 2004, 2009, 2014 में सीट बरकरार रखी।
- 1991 से 1992 के बीच अजित पवार ने मुख्यमंत्री सुधाकरराव नाइक की सरकार में कृषि और ऊर्जा राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
- 1992 में शरद पवार के मुख्यमंत्री बनने पर अजित पवार को मृदा संरक्षण, ऊर्जा और नियोजन राज्य मंत्री बनाया गया।
- 1999 में कांग्रेस–एनसीपी गठबंधन सरकार के दौरान अजित पवार को सिंचाई विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
- 2003 में सुशीलकुमार शिंदे के मंत्रिमंडल में अजित पवार को अतिरिक्त रूप से ग्रामीण विकास विभाग का प्रभार सौंपा गया।
- 2004 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस–एनसीपी गठबंधन की जीत के बाद अजित पवार ने विलासराव देशमुख और बाद में अशोक चव्हाण के मंत्रिमंडल में जल संसाधन मंत्रालय का दायित्व संभाला।
- अजित पवार ने जुलाई 2004 से नवंबर 2004 तक ग्रामीण विकास, जल आपूर्ति और स्वच्छता, सिंचाई मंत्री का पदभार संभाला।
- उन्होंने नवंबर 2004 से नवंबर 2009 तक जल संसाधन मंत्री और स्वच्छता मंत्री का पद संभाला।
- अजित ने नवंबर 2009 से नवंबर 2010 तक जल संसाधन मंत्री, ऊर्जा मंत्री का पद संभाला।
- वह नवंबर 2010 से सितंबर 2012 तक उप मुख्यमंत्री (वित्त, योजना और ऊर्जा) की कुर्सी पर रहे।
- अजित पवार ने दिसंबर 2012 से सितंबर 2014 तक उप मुख्यमंत्री (वित्त, योजना और ऊर्जा) का पद संभाला।
- 23 नवंबर 2019 से 26 नवंबर 2019 में वह करीब 80 घंटे के लिए उपमुख्यमंत्री रहे जब उन्होंने देवेंद्र फड़नवीस के साथ गठबंधन सरकार में शपथ ली।
- अजित पवार दिसंबर 2019 से जून 2022 में महा विकास आघाडी (MVA) सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे।
- जुलाई 2023 से वर्तमान तक फिर से उपमुख्यमंत्री नियुक्त हुए।
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2024 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में एनसीपी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करने के बावजूद अजित सिर्फ एक सीट जीत सके थे। वहीं, जब बीजेपी, शिवसेना और NCP के महायुति गठबंधन ने 2024 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो अजित पवार ने 41 सीटों पर जीत हासिल की।
चाचा शरद पवार से विवाद
साल 2019 में अजित पवार ने अपने चाचा और पार्टी संरक्षक शरद पवार के खिलाफ खुली बगावत दिखाते हुए देवेंद्र फड़नवीस को सीएम बनाने के बीजेपी के साथ अप्रत्याशित गठबंधन किया और खुद उपमुख्यमंत्री बन गए। हालांकि, उन्होंने तीन दिन बाद इस्तीफा दे दिया और बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिससे फड़नवीस को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
दिसंबर 2019 में, अजित पवार अपने चाचा के साथ वापस आ गए और उद्धव ठाकरे के महा विकास अघाड़ी गठबंधन के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री के रूप में सरकार में फिर से शामिल हो गए। जुलाई 2023 में अजित पवार ने एक बार फिर अपने चाचा के खिलाफ विद्रोह किया जिससे उनकी पार्टी में विभाजन हो गया और वे भाजपा-एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सरकार में शामिल हो गए।
अजित पवार से जुड़े विवाद
अजित पवार ने 2013 में राज्य के कुछ हिस्सों में पानी और बिजली की गंभीर कमी का मजाक उड़ाते हुए एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। अपनी टिप्पणियों को लेकर आलोचनाओं से घिर जाने के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। पुणे के इंदापुर के एक गांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सोलापुर के सूखाग्रस्त इलाके के किसान भैया देशमुख का उपहास उड़ाया था, जो मुंबई के आजाद मैदान में अधिक पानी की मांग को लेकर अनशन पर थे। उन्होंने कहा था, ”वह पिछले 55 दिनों से अनशन पर हैं। अगर बांध में पानी ही नहीं है, तो हम उसे कैसे छोड़ सकते हैं? क्या हम उसमें पेशाब कर दें? अगर पीने के लिए पानी ही नहीं है, तो पेशाब करना भी संभव नहीं है।”
वहीं, राज्य के कुछ हिस्सों में बिजली कटौती की स्थिति का जिक्र करते हुए अजित पवार ने कहा था, ”मैंने देखा है कि रात में बिजली जाने के कारण अधिक बच्चे पैदा हो रहे हैं। ऐसा लगता है कि फिर करने के लिए कोई और काम नहीं बचता।”
अजित पवार का परिवार
अजित पवार की शादी महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पदमसिंह बाजीराव पाटिल की बेटी सुनेत्रा पवार से हुई है। दोनों के दो बेटे हैं, जय पवार और पार्थ पवार. जय जहां बिजनेस से जुड़े हैं, वहीं पार्थ ने पिता के नक्शेकदम पर राजनीति में उतरते हुए साल 2019 में महाराष्ट्र के मावल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए।
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