संदीप भूषण
बांग्लादेश के खिलाफ 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत करने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने टैस्ट के बाद अब एकदिवसीय और टी-20 की कप्तानी से भी अलविदा कह दिया है। उनका यह फैसला चौंकाने वाला है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ी के तौर पर वे अभी टीम से जुड़े रहेंगे। धोनी के इस फैसले ने एक तरफ जहां भारतीय टीम से एक बेहतरीन और जुझारू कप्तान छीना वहीं कई सवाल भी छोड़े। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति के सुझाए सुधारों को लागू न करने के बाद बीसीसीआइ के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को पद से हटाने के तुरंत बाद धोनी का फैसला कुछ और ही इशारा करता है। क्रिकेट जगत के दिग्गजों के मुताबिक माही का फैसला 2019 में होने वाले विश्व कप में एक मजबूत टीम को तैयार करने में नए कप्तान को अनुकूल अवसर मुहैया कराने का है। खैर, इन सब के बावजूद धोनी की कप्तानी को भुलाना आसान नहीं है। उनके कार्यकाल में भारत ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों में ऊंचाइयों को छुआ है। विश्व कप के बाद टी-20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को विजयी बनाने वाले एकमात्र कप्तान धोनी का व्यक्तिगत करिअर शानदार रहा है।

धोनी को बीसीसीआइ व आइसीसी के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन का चहेता माना जाता था। जब श्रीनिवासन ने पद छोड़ा था तब भी यह कयास लगने लगे थे कि धोनी अब कप्तानी से सन्यास ले सकते हैं। तब इसकी वजह इंग्लैंड और आस्ट्रलिया में लगातार आठ टैस्ट में मिली हार बताई जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद अनुराग ठाकुर के साथ भी धोनी के काफी मधुर संबंध रहे। हालांकि इसी तरह चौंकाते हुए धोनी ने टैस्ट की कप्तानी छोड़ी थी। उस समय भी हालात कुछ ऐसे थे कि आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कई खिलाड़ियों के नाम आने की संभावना से पहले धोनी ने अचानक ही कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था।
2016 में फीका प्रदर्शन
वहीं धोनी का प्रदर्शन 2016 में कुछ खास नहीं रहा। एकदिवसीय मैचों में कुछ सात जीत और टी-20 में 15 जीत के साथ धोनी ने साल का अंत किया। इस दौरान भारतीय टीम को आस्ट्रेलिया में हार का मुंह देखना पड़ा और ज्यदातर जीत कमजोर टीमों के खिलाफ ही रही। धोनी ने पिछले साल कुल 13 एकदिवसीय मैचों में 278 रन बनाए और टी-20 के 21 मैचों में 238 रन बनाए। यह प्रदर्शन कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि धोनी कमजोर पड़ रहे थे। साथ ही विराट कोहली के जबरदस्त खेल ने भी धोनी को सोचने पर मजबूर कर दिया होगा।
2019 विश्व कप में कोहली को जिम्मेवारी
धोनी के कप्तानी से रिटायर होने की एक वजह 2019 में होने वाले विश्व कप के लिए भारत को नया और मजबूत कप्तान देना भी हो सकता है। दरअसल इस साल धोनी कप्तान के तौर पर खेलते तो भी उनके पास कोई बड़ा मौका नहीं था। क्योंकि इस साल बड़े मैच के तौर पर उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ तीन एकदिवसीय और तीन टी-20 के अलावा कुछ नहीं मिलता। इसलिए टीम मैनेजमेंट भी विराट को एकदिवसीय मैचों में कप्तानी सौंप कर उन्हें मजबूत बनाना चाहती होगी।
धोनी के मजबूत फैसले
2007 टी-20 फाइनल में जोगिंदर सिंह से आखिरी ओवर कराना
2007 टी-20 में बॉल आउट के दौरान वीरेंद्र सहवाग और रॉबिन उथप्पा से गेंदबाजी कराना
2011 विश्व कप में युवराज सिंह को नियमित गेंदबाद के तौर पर इस्तेमाल करना
रोहित को ओपनर के तौर पर प्रमोट करना और नेहरा से विश्व कप में गेंदबाजी कराना
चमकता करिअर
धोनी भारत के इकलौते कप्तान हैं जिन्होंने आइसीसी के सभी प्रारूपों में भारत को जीत दिलाई है। 199 मैचों में टीम का नेतृत्व करने वाले धोनी ने 110 में जीत दिलाई है। 60 टैस्ट में कप्तानी करने वाले धोनी ने 27 में जीत का स्वाद चखाया है। 72 टी-20 मैचों में कप्तानी करने वाले धोनी ने 41 में भारत को जीत तक पहुंचाया।
पोंटिंग और फ्लेमिंग के बाद सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी
महेंद्र सिंह धोनी रिकी पोंटिंग और स्टीफन फ्लेमिंग के बाद सबसे ज्यादा एकदिवसीय मैचों में कप्तानी का रेकॉर्ड बनाया है। 283 मैचों में खेलते हुए उन्होंने 199 में कप्तानी की है।